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गवाहों के मुकरने पर भी DNA साक्ष्य भारी, गैंगरेप-हत्या के दोषियों की सजा बरकरार- HC

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10 फ़र. 2026, 02:30 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बालोद जिले के एक जघन्य गैंगरेप और हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि न्याय की प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्यों की अहमियत सर्वोच्च है और यदि चश्मदीद गवाह अपने बयानों से मुकर भी जाएं (होस्टाइल हो जाएं), तब भी पुख्ता DNA रिपोर्ट के आधार पर सजा सुनाई जा सकती है. 


न्यायालय ने कमलनारायण साहू, कमलेश कुमार श्रीवास और उत्तम कुमार रावाते द्वारा दायर आपराधिक अपीलों को खारिज करते हुए निचली अदालत के उस फैसले पर मुहर लगा दी, जिसमें उन्हें प्राकृतिक जीवन के अंत तक कठोर कारावास की सजा दी गई थी.


यह मामला जून 2021 का है, जब बालोद के ग्राम कोसमी में एक महिला का शव उसके बंद घर में संदिग्ध अवस्था में मिला था. महिला के हाथ पीछे बंधे हुए थे और चेहरे व गर्दन पर चोट के गंभीर निशान थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महिला की मौत दम घोंटने (स्मोदरिंग) के कारण हुई थी और हत्या से पहले उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. 


पुलिस जांच के दौरान मुख्य आरोपी कमलनारायण साहू के साथ मृतका के पुराने संबंधों की बात सामने आई, जिसके बाद तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पीड़िता के शरीर से लिए गए नमूनों और घटनास्थल पर मौजूद तकिए पर पाए गए जैविक अवशेषों का मिलान आरोपियों के डीएनए प्रोफाइल से हो गया.


हालांकि, सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया था कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और अधिकांश अभियोजन पक्ष के गवाह मुकर चुके हैं. उन्होंने डीएनए सैंपलिंग की प्रक्रिया और उनकी सुरक्षा (Chain of Custody) पर भी सवाल उठाए, लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया. 


अदालत ने माना कि जांच अधिकारियों ने वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पूरी तरह पालन किया है. न्यायालय ने अपने निर्णय में जोर देकर कहा कि डीएनए साक्ष्य एक शक्तिशाली वैज्ञानिक उपकरण है जो आरोपियों और अपराध स्थल के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है. 


इस फैसले ने यह नजीर पेश की है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी में वैज्ञानिक रिपोर्ट का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है, जो मानवीय गवाहों की अनुपस्थिति या विफलता की स्थिति में भी न्याय सुनिश्चित कर सकती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP