बस्तर की 'ग्रीन केव' पर छिड़ी बहस: विकास बनाम पर्यावरण
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित दुर्लभ और पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील 'ग्रीन केव' (हरी गुफा) को पर्यटकों के लिए खोलने का निर्णय लिया है. कभी माओवाद प्रभावित रहे इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति सुधरने के बाद राज्य सरकार बस्तर के पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाने की कोशिश कर रही है.
राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप के अनुसार, इस पहल से स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी.
हालांकि, वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस फैसले पर कड़े विरोध की चेतावनी दी है.
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर महेश जी. ठक्कर और पर्यावरण प्रेमी नितिन सिंघवी का तर्क है कि यह गुफा लाखों वर्षों की भूगर्भीय प्रक्रियाओं से बनी है और एक बंद पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि मानवीय हस्तक्षेप, पदचाप, धूल और शोर से गुफा की विशिष्ट नमी और सूक्ष्मजीवी परतों (Microbial Layers) को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है.
इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) के पास शिकायत भी दर्ज कराई गई है, जिसमें आगाह किया गया है कि पर्यटकों की आवाजाही से बढ़ने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और गर्मी इस नाजुक प्राकृतिक धरोहर को हमेशा के लिए नष्ट कर सकती है.