छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुई नी-रीप्लेसमेंट की सफल सर्जरी
दंतेवाड़ा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर के दंतेवाड़ा में घुटना बदलने की सफल सर्जरी, आयुष्मान भारत योजना के तहत हुई है. इस सर्जरी को नी-रीप्लेसमेंट सर्जरी के नाम से जाना जाता है. जब छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर जैसे शहरों से लोग यह सर्जरी करवाने नागपुर तथा बड़े शहरों के कॉर्पोरेट अस्पताल का रुख करते हैं, उस समय दंतेवाड़ा में इस सर्जरी को अंजाम देना एक बड़ी खबर है.
बरसों से घुटने के दर्द के साथ जी रही एक आदिवासी महिला के लिए यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत है. दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में पहली बार एडवांस्ड टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई और इसी के साथ यह भरोसा भी मजबूत हुआ कि अब इलाज के लिए दूर-दराज़ के बड़े शहरों की मजबूरी नहीं रही.
कुआकोंडा विकासखंड के महारापारा की 45 वर्षीय श्रीमती शांति रोज़मर्रा की ज़िंदगी में संघर्ष कर रही थीं. साप्ताहिक हाट में चूड़ियों का छोटा-सा व्यवसाय चलाने वाली शांति के लिए चलना-फिरना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया था. दाएं घुटने के असहनीय दर्द ने काम, आमदनी और आत्मविश्वास सब कुछ छीन लिया था.
जिला अस्पताल में जांच के बाद उन्हें गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस बताया गया. 6 जनवरी को भर्ती और 13 जनवरी को उनका टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया. ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा. आज शांति के चेहरे पर सुकून है “पहले हर कदम दर्द देता था, अब आराम है,” उन्होंने मुस्कराते हुए कहा.
ऑपरेशन करने वाले ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह अत्याधुनिक प्रक्रिया घुटने के क्षतिग्रस्त जोड़ को कृत्रिम इम्प्लांट से बदलती है, जिससे लंबे समय का दर्द खत्म होता है और चलने-फिरने की क्षमता लौटती है.
इस इलाज की खास बात यह भी रही कि पूरा खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ यानी शांति को जेब से एक रुपया भी नहीं देना पड़ा. उन्होंने सरकार और अस्पताल प्रशासन का आभार जताया.
वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण और आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जैसे जिले में इस स्तर की सर्जरी का होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर है. प्रशिक्षित सर्जन, एनेस्थीसिया सपोर्ट, नर्सिंग स्टाफ और मज़बूत पोस्ट ऑपरेटिव केयर सबकी साझा मेहनत ने यह संभव किया.
अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सुविधा शासन की योजनाओं के तहत निःशुल्क उपलब्ध है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी अत्याधुनिक इलाज अपने जिले में ही मिल सके.दंतेवाड़ा के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं यह भरोसे की जीत है.