छत्तीसगढ़ कंज्यूमर कमीशन: हाउसिंग बोर्ड को 21.8 लाख रुपये ब्याज समेत लौटाने के आदेश
मकान का निर्माण गुणवत्तापूर्ण न होने पर उपभोक्ता आयोग का सख्त कदम: छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को पीड़ित दंपत्ति का 21.8 लाख रुपये 7.5% ब्याज के साथ 30 दिनों में लौटाने का आदेश.
रायपुर । संवाददाता: राजनांदगांव जिले की प्रसिद्ध ‘अटल बिहार आवास योजना’ से जुड़े एक विवाद में छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) की कार्यप्रणाली में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता गीता शुक्ला और निर्मल शुक्ला को उनके द्वारा जमा किए गए 21,83,567 रुपये की पूरी राशि लौटाने का आदेश दिया है. इसके साथ ही आयोग ने 19 फरवरी 2019 से अंतिम भुगतान होने तक इस राशि पर 7.5 प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज का भुगतान करने के निर्देश भी दिए हैं.
उपभोक्ता आयोग ने अपने सख्त रुख का परिचय देते हुए हाउसिंग बोर्ड को मानसिक प्रताड़ना के एवज में 50,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 20,000 रुपये अतिरिक्त अदा करने के लिए कहा है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि गृह निर्माण मंडल को इस पूरी राशि का भुगतान 9 अक्टूबर को आए फैसले के 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से करना होगा.
यह पूरा मामला घटिया निर्माण गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है. पीड़ित दंपत्ति ने योजना के तहत मकान बुक कराया था, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर उन्होंने बोर्ड से शिकायत की. समाधान न निकलने पर दंपत्ति ने आवंटन रद्द कर ब्याज सहित राशि वापस मांगी.
जवाब में हाउसिंग बोर्ड ने दावा किया कि निर्माण पूरा हो चुका था और नियमानुसार कटौती के बाद ही रिफंड संभव है, जिस पर ब्याज देने की उनकी कोई बाध्यता नहीं है.
हालांकि, आयोग ने योजना के आधिकारिक नियमों की समीक्षा के बाद बोर्ड के तर्कों को खारिज कर दिया. आयोग ने पाया कि यदि लाभार्थी निर्माण की गुणवत्ता से असंतुष्ट होकर आवंटन रद्द कराता है, तो नियम अनुसार बोर्ड 7.5% वार्षिक ब्याज के साथ राशि लौटाने के लिए बाध्य है.
आयोग ने यह भी उजागर किया कि बोर्ड ने बाद में यह मकान किसी दूसरे खरीदार को बेच दिया था, फिर भी पीड़ित दंपत्ति का पैसा लंबे समय तक अटका कर रखा गया.