सोम, 26 अक्टू. 2026

CGKhabar

छत्तीसगढ़ धर्मांतरण कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

छत्तीसगढ़ के नए धर्मांतरण विरोधी कानून की संवैधानिक वैधता अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गई है. ईसाई आदिवासी महासभा की याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में कानून के तहत 30 दिन की पूर्व सूचना और धर्म वापसी की छूट जैसे कई कड़े प्रावधानों को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है.

C

CG Khabar

26 अक्टू. 2026, 07:59 PM 2 मिनट में पढ़ें 47

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के धर्मांतरण विरोधी कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ऐसे ही धर्मांतरण विरोधी कानूनों के खिलाफ लंबित याचिकाओं के साथ टैग कर दिया है.

ईसाई आदिवासी महासभा द्वारा दायर इस याचिका में मार्च महीने में छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुए सख्त धर्मांतरण रोधी कानून को चुनौती दी गई है. 

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस ने अदालत में तर्क दिया कि यह कानून नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन करता है. याचिका में कहा गया है कि बेहतर जीवन शैली का वादा करने या धर्म की प्रशंसा करने को भी कानून के तहत अवैध प्रलोभन के दायरे में ला दिया गया है, जो सामान्य धार्मिक प्रचार और मानवीय कार्यों को भी अपराध के दायरे में ला सकता है.

इसके अलावा, कानून में शामिल प्रक्रियाओं पर भी कड़ा एतराज जताया गया है. नए प्रावधानों के मुताबिक धर्मांतरण की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को इसकी पूर्व सूचना देनी होगी, जिसे ग्राम पंचायत और स्थानीय पुलिस थाने के नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक किया जाएगा. 

याचिका में इस सार्वजनिक प्रक्रिया को व्यक्तिगत गोपनीयता और स्वायत्तता पर आघात बताया गया है. साथ ही, मूल धर्म या 'पूर्वजों के धर्म' में वापसी को इस कानून के दायरे से बाहर रखने के प्रावधान को भी अस्पष्ट और पक्षपातपूर्ण बताया गया है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के इस कानून में सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास और महिलाओं, नाबालिगों या अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों के धर्मांतरण से जुड़े मामलों में 7 से 10 साल तक की कठोर सजा का प्रावधान किया गया है. 

चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मामले पर नोटिस जारी करते हुए सुनवाई शुरू कर दी है, जिससे इस राज्य स्तरीय कानून के भविष्य पर कानूनी समीक्षा की शुरुआत हो गई है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
चक्रवात- File Photo
छत्तीसगढ़

SDRF और NDRF तैनात, चक्रवात 'अर्णव' को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ में अलर्ट जारी

एक घंटा पहले

AI Generated Photo
छत्तीसगढ़

फिंगरप्रिंट न मिलने पर भी नहीं रुकेगा राशन, खाद्य विभाग ने दिए वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश

एक घंटा पहले

सांकेतिक फोटो
छत्तीसगढ़

सुकमा में CRPF को जंगलों में मिला नक्सलियों का विस्फोटक डंप, 79 जिलेटिन स्टिक बरामद

एक घंटा पहले

AI Generated Photo
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा पर शासकीय कर्मचारियों को सामान्य अवकाश मिला

2 घंटे पहले

पिकअप के चेंबर में 4 करोड़ रुपये बरामद
छत्तीसगढ़

रायपुर से यूपी भेजी जा रही 4 करोड़ की संदिग्ध नकदी जब्त, दो लोग हिरासत में

5 घंटे पहले

रायगढ़ में हत्यारा गिरफ्तार
छत्तीसगढ़

रायगढ़: नशे और बिरयानी के पैसों के लिए सो रहे व्यक्ति पर चाकू से हमला, मौत

5 घंटे पहले

CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP