रायपुर के प्रथम पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला का गौरवशाली सफर
रायपुर । संवाददाता: डॉ. संजीव शुक्ला रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में नियुक्त किए गए हैं, जिनका प्राथमिक लक्ष्य राजधानी की कानून-व्यवस्था को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप ढालना और अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना है.
डॉ. संजीव शुक्ला का इस पद के लिए चयन उनके तीन दशकों से अधिक के बेदाग और साहसी पुलिसिंग करियर का परिणाम माना जा रहा है. 8 जनवरी 1967 को जन्मे डॉ. शुक्ला का रायपुर शहर से गहरा और पुराना नाता रहा है. उनकी उच्च शिक्षा रायपुर के प्रसिद्ध दुर्गा कॉलेज से हुई, जहाँ से उन्होंने एम.कॉम की डिग्री हासिल की और बाद में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की.
अपने छात्र जीवन के दौरान वे छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे, जिसने उनके नेतृत्व कौशल और जनसेवा की भावना को निखारा. 1990 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से राज्य पुलिस सेवा (SPS) में चयनित होने के बाद, उन्होंने अपनी कार्यक्षमता के दम पर 2004 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का कैडर प्राप्त किया.
डॉ. शुक्ला का सेवा रिकॉर्ड उनके विविध अनुभवों की गवाही देता है. उन्होंने दुर्ग और रायगढ़ जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में लंबी पारी खेली है. विशेष रूप से दुर्ग में उनके सात साल के कार्यकाल के दौरान संगठित अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियानों और कानून-व्यवस्था के सख्त प्रबंधन की आज भी चर्चा होती है.
इसके अलावा, बिलासपुर रेंज के आईजी (IG) और छत्तीसगढ़ सीआईडी के प्रमुख के रूप में उन्होंने कई संवेदनशील मामलों को सुलझाया और खुफिया-आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा दिया. उन्हें केवल फील्ड ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि पुलिस प्रशिक्षण में भी विशेषज्ञता हासिल है, जो उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी में उप निदेशक के पद पर रहते हुए अर्जित की.
कमिश्नरेट प्रणाली के तहत रायपुर पुलिस की कार्यशैली में अब व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा. इस व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर के पास वे मजिस्ट्रियल शक्तियाँ निहित होती हैं, जो सामान्यतः जिला मजिस्ट्रेट के पास होती हैं. इससे न केवल दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत धारा 144 लागू करने, लाठीचार्ज या बल प्रयोग की अनुमति देने जैसे निर्णयों में तेजी आएगी, बल्कि अपराधियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं में भी सुगमता होगी.
डॉ. शुक्ला की नियुक्ति से राजधानी में बढ़ते साइबर अपराध, यातायात प्रबंधन और संगठित गिरोहों पर नकेल कसने में मदद मिलने की प्रबल संभावना है.
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने उन्हें कई बार सम्मानित किया है.
डॉ. संजीव शुक्ला को वर्ष 2010 में 'सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक' और वर्ष 2022 में 'विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक' प्रदान किया गया है.
इतना ही नहीं, जून 2023 में केंद्र सरकार ने उन्हें भारत सरकार के अधीन महानिरीक्षक स्तर के पदों के लिए सूचीबद्ध कर उनके प्रशासनिक कौशल पर राष्ट्रीय स्तर की मुहर लगाई थी.