छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को दी मंजूरी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने बुधवार को वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए राज्य की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास में हुई कैबिनेट बैठक में आबकारी विभाग को नीति के क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक और परिचालन कदम उठाने का अधिकार प्रदान किया गया. नीति का विस्तृत विवरण औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद सार्वजनिक किया जाएगा.
इस बैठक को लेकर अटकलें थीं कि राज्य में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह विषय बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था.
आबकारी नीति के अलावा कैबिनेट ने शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए. मंत्रिमंडल ने नवा रायपुर में प्रतिष्ठित शैक्षणिक ट्रस्ट एसवीकेएम (SVKM) को 40 एकड़ भूमि 90 वर्ष की लीज पर आवंटित करने को मंजूरी दी.
इस भूमि पर उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की जाएगी, जिससे राज्य में आधुनिक शिक्षा और उन्नत शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
राज्य में आईटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर को भी स्वीकृति दी. इसके तहत नवा रायपुर में चार नए उद्यमिता केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनसे अगले तीन से पांच वर्षों में करीब 133 स्टार्टअप्स को समर्थन मिलने की संभावना है.
साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) सेंटर की स्थापना का भी निर्णय लिया गया है, जिससे हर साल 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्टअप्स और एमएसएमई को सहायता मिलेगी.
स्वास्थ्य क्षेत्र में कैबिनेट ने सरकारी अस्पतालों में डायग्नोस्टिक और लैब सुविधाओं को सुदृढ़ करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी. इससे जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच सुविधाओं में सुधार होगा और आम लोगों को बेहतर व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी.
उल्लेखनीय है कि यह कैबिनेट बैठक राज्य सचिवालय के बजाय मुख्यमंत्री निवास में आयोजित की गई, जिसमें सभी मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे. सरकार के इन फैसलों से राज्य में राजस्व प्रशासन, शिक्षा की गुणवत्ता, स्टार्टअप विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है.