छत्तीसगढ़: BJP MP लापरवाह अधिकारियों को सजा देने 'नींबू काटेंगे'
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के एक भाजपा सांसद भोजराज नाग के बयानों ने विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कथित तौर पर लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों को "सजा" देने के लिए रस्मों-रिवाजों का हवाला दिया है.
कांकेर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद भोजराज नाग ने गुरूवार को धमतरी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि वे लोगों की शिकायतों का जवाब देने या फोन कॉल उठाने में विफल रहते हैं, तो वह "उन सभी के लिए नींबू काटेंगे".
यह टिप्पणी बस्तर के एक स्थानीय अंधविश्वास से जुड़ी है, जिसके अनुसार किसी के नाम पर नींबू काटने से उस व्यक्ति पर दुर्भाग्य आता है.
बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाग ने कहा, "मुझे बताएं कि कौन से अधिकारी कॉल का जवाब नहीं देते हैं, बात नहीं करते हैं, और लोगों की समस्याओं को नहीं सुनते हैं. मैं उन सभी के लिए नींबू काटूंगा."
यह ऐसे राज्य में हुआ है जहां 'छत्तीसगढ़ टोन्ही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005' लागू होने के बावजूद अंधविश्वास से संबंधित अपराधों में लगातार लोगों की जान जा रही है.
नाग ने पहले भी इस रूपक का इस्तेमाल नौकरशाहों को अनुशासित करने के संदर्भ में किया है. एक बार उन्होंने कहा था कि वह "नींबू काटकर भूत भगाएंगे".
पिछले साल पाखनजोर, कांकेर में एक आवास मेले के दौरान, नाग ने "पुरानी मानसिकता" वाले अधिकारियों को सुधार करने की चेतावनी दी थी, या चुनाव के छह महीने बाद वह "उनका भूत भगाना" शुरू कर देंगे.
जहां ऐसे बयान गहरी आस्था को दर्शाते हैं जो आदिवासी परंपराओं का आधार हैं, वहीं वे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और अंधविश्वास के बीच की रेखा को भी धुंधला करते हैं, खासकर जब एक संवैधानिक पद धारण करने वाला सार्वजनिक प्रतिनिधि इसका आह्वान करता है.
सांसद की टिप्पणी राज्य में अंधविश्वास से जुड़ी व्यापक हिंसा की पृष्ठभूमि में भी आई है. जादू-टोना विरोधी अधिनियम के बावजूद, गुप्त मान्यताओं से जुड़े अपराध खतरनाक रूप से बार-बार हो रहे हैं.
गौरतलब है कि जनवरी 2020 से जून 2024 तक, छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास से जुड़ी 54 हत्याएं दर्ज की गईं. राज्य के आंकड़ों के अनुसार, सालाना 200 से अधिक अंधविश्वास से संबंधित हिंसा की घटनाएं होती हैं.
एनसीआरबी 2021 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में जादू-टोना के सबसे अधिक मामले 20 दर्ज किए गए, इसके बाद मध्य प्रदेश 18 का स्थान रहा. 2005 और 2017 के बीच, राज्य में जादू-टोना और अंधविश्वास से संबंधित लगभग 1,350 मामले दर्ज किए गए. 'छत्तीसगढ़ टोन्ही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005' हानिकारक अंधविश्वासी कृत्यों को बढ़ावा देने या अभ्यास करने के लिए दंड का प्रावधान करता है.