छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने जिंदल के आवंटन को रद्द करने की मांग की
रायगढ़ । संवाददाता: छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि रायगढ़ पहुंचे और पंचायती धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कोयला खनन से जुड़े गंभीर मुद्दों पर आवाज उठाई. आंदोलनकारियों ने जिले के तमनार क्षेत्र में चल रहे खनन कार्यों की कड़ी आलोचना की तथा कहा कि इससे स्थानीय निवासियों की आजीविका, स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है.
प्रतिनिधियों का कहना था कि गारे पेलमा खंड-1 की कोयला खदान से प्रभावित गांवों में वर्षों से प्रदूषण और विस्थापन की समस्या बनी हुई है, लेकिन ग्रामीणों को न तो पर्याप्त रोजगार मिला और न ही उचित पुनर्वास की व्यवस्था हुई.
लगभग 25 वर्षों से खदान चल रही है, फिर भी कई इलाकों में पीने के पानी की गंभीर कमी है और मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है.
आंदोलन के नेताओं ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए बताया कि तमनार में ग्रामीणों ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
इससे प्रतीत होता है कि अधिकारी कंपनी के हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसके अलावा, 12 जनवरी को सौंपी गई एक शिकायत पर भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
पत्रकार वार्ता में 8 दिसंबर 2025 को हुई कथित अनियमित ग्राम सभा और 27 दिसंबर 2025 को पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच हुए टकराव की घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच की जोरदार मांग की गई. आंदोलनकारियों ने दावा किया कि उस घटना में कुछ निर्दोष युवाओं तथा छात्रों को गिरफ्तार किया गया, जबकि महिला पुलिसकर्मी के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की भी जांच आवश्यक है. उन्होंने गिरफ्तार युवाओं की तत्काल रिहाई की मांग की.
मुख्य मांगों में जिंदल कंपनी को दिए गए गारे पेलमा खंड-1 के खनन आवंटन को पूरी तरह निरस्त करने, प्रभावित गांवों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता से नौकरियां देने तथा विस्थापित परिवारों के लिए समुचित पुनर्वास पैकेज की व्यवस्था करने की बात शामिल है.
आंदोलन के पदाधिकारियों ने प्रशासन और पुलिस से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल लोगों को उत्पीड़ित न करने की अपील की. उन्होंने वार्ता के माध्यम से मुद्दों का समाधान निकालने पर बल दिया. साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को पूरे राज्य में और अधिक मजबूती से चलाया जाएगा.