छत्तीसगढ़: सुकमा में पागल कुत्ते ने दो दिन में 25 लोगों को काटा
सुकमा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक संक्रमित आवारा कुत्ते ने पिछले दो दिनों में लोगों के बीच खौफ पैदा कर दिया है. शुक्रवार से शनिवार सुबह तक इस कुत्ते ने लगभग 25 व्यक्तियों को काट लिया, जिनमें महिलाएं, बच्चे और वृद्ध भी शामिल हैं.
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, कुत्ता शहर के विभिन्न इलाकों में भटकता रहा और अचानक राहगीरों पर टूट पड़ता था. हमले में कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए, जिन्हें परिजनों और पड़ोसियों ने मिलकर जिला अस्पताल पहुंचाया.
शनिवार को भी कुत्ते ने सुबह-सुबह चार-पांच और लोगों पर हमला कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया.
घटना की सूचना मिलते ही नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग की टीमें हरकत में आईं. नगर पालिका कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद कुत्ते को पकड़ लिया और उसे जांच व इलाज के लिए सुरक्षित जगह पर ले जाया गया.
स्वास्थ्य विभाग ने सभी पीड़ितों को एंटी-रेबीज वैक्सीन सहित जरूरी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है. साथ ही नगर पालिका ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और विशेषकर बच्चों को अकेले बाहर न जाने दें.
कुत्ते के पकड़े जाने के बाद शहर में स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन लोगों के मन में अभी भी दहशत बनी हुई है.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में मानव सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं.
नसबंदी और टीकाकरण का पालन: Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023 के अनुसार, कुत्तों को पकड़कर नसबंदी, टीकाकरण और डीवॉर्मिंग के बाद सामान्यतः उसी इलाके में वापस छोड़ा जाए. केवल रेबीज से पीड़ित, संदिग्ध या आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए.
विशेष सार्वजनिक जगहों से हटाना: स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, खेल परिसर जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में भेजा जाए और वहां से वापस न छोड़ा जाए.
खाना खिलाने के नियम: सड़क या सार्वजनिक जगहों पर खुले में कुत्तों को खाना खिलाना प्रतिबंधित. हर वार्ड में निर्धारित जगहें बनाई जाएं जहां ही खिलाया जा सके.
राज्यों की जिम्मेदारी: कुत्ते के काटने से चोट या मौत (खासकर बच्चों/बुजुर्गों को) होने पर राज्य सरकारों को मुआवजा देने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि ABC नियमों का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा.
अन्य निर्देश: शेल्टर की व्यवस्था मजबूत करें, Animal Welfare Board को SOP जारी करने को कहा गया, और कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने पर जोर.
यह मामला अभी चल रहा है (जनवरी 2026 तक सुनवाई जारी), और कोर्ट ने राष्ट्रीय नीति बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं. पुराना नियम कि कुत्तों की हत्या नहीं की जा सकती, बरकरार है.
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