बिना ठोस सबूत लंबी शादी खत्म नहीं की जा सकती- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 35 साल पुरानी शादी को खत्म करने की पति की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केवल अलग रहना ही तलाक का आधार नहीं हो सकता. न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बेमेतरा फैमिली कोर्ट के पूर्व फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि लंबे समय तक चले वैवाहिक संबंधों में क्रूरता और परित्याग के आरोपों के लिए स्पष्ट, विशिष्ट और विश्वसनीय सबूतों की आवश्यकता होती है.
मामला बेमेतरा जिले का है, जहाँ एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी पर झगड़ालू होने, मानसिक प्रताड़ना देने और पिछले 14-15 वर्षों से बेटी-दामाद के साथ रहकर उसे छोड़ने का आरोप लगाया था.
हालांकि, पत्नी ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि पति के दुर्व्यवहार, चरित्र पर संदेह और बीमारी की हालत में खर्च न उठाने के कारण उसे मजबूरी में बच्चों के पास शरण लेनी पड़ी.
हाईकोर्ट ने पाया कि पति के गवाहों के बयान सामान्य प्रकृति के थे और उनमें किसी भी ठोस घटना का जिक्र नहीं था.
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए जोर दिया कि तलाक एक गंभीर नागरिक परिणाम है, जिसे महज अनुमानों या सामान्य आरोपों के आधार पर नहीं दिया जा सकता. खंडपीठ ने यह भी कहा कि क्रूरता को निश्चित कृत्यों के माध्यम से साबित करना आवश्यक है, जो इस मामले में पति करने में विफल रहा.