छत्तीसगढ़: नौ क्षेत्रीय दलों की मान्यता खतरे में
छत्तीसगढ़: नौ क्षेत्रीय दलों की सांसें थमने को, मान्यता खतरें में
रायपुर । संवाददाता: राजनीतिक दलों के लिए पारदर्शिता का नियम सख्ती से लागू होता है, जैसा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29ए में स्पष्ट है. इस प्रावधान के तहत, यदि कोई पंजीकृत दल वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट और चुनावी खर्च का विवरण समय पर जमा नहीं करता, तो उसकी मान्यता रद्द हो सकती है. यह व्यवस्था जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनी है, जो लोकतंत्र की मजबूती का आधार है.
ऐसे ही उल्लंघन के आरोप में छत्तीसगढ़ की नौ क्षेत्रीय पार्टियां अब मुश्किल में फंस चुकी हैं. इनमें भारत भूमि पार्टी, भारतीय जनता सेक्युलर पार्टी, भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच, छत्तीसगढ़ विकास गंगा राष्ट्रीय पार्टी, छत्तीसगढ़ समाज पार्टी, छत्तीसगढ़िया पार्टी, पिछड़ा समाज पार्टी यूनाइटेड और राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी का नाम शामिल है. राज्य निर्वाचन आयोग ने इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, और अब अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के पास पहुंच चुका है.
ईसीआई को मिले एक महीने के अंदर यह तय होगा कि इन दलों को पंजीकरण सूची में बने रहने का मौका मिलेगा या उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. राज्य आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन पार्टियों को कारण बताओ नोटिस भेजे थे. 9 अक्टूबर 2025 को निर्धारित सुनवाई में कई दलों ने कोई प्रतिनिधित्व नहीं किया, जिससे मामला और गंभीर हो गया.
मुख्य आरोप यह है कि इन दलों ने वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के लिए अपने लेखा-परीक्षित खाते निर्धारित समय-सीमा-30 नवंबर 2022, 31 दिसंबर 2023 तथा 15 दिसंबर 2024-तक जमा नहीं किए. ऊपर से, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हिस्सा लेने के बावजूद, इन्होंने 75 या 90 दिनों की तय अवधि में चुनावी खर्च की रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की.
ऐसे कदमों से न केवल दलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता भी प्रभावित होती है.
राज्य निर्वाचन आयोग ने सुनवाई पूरी कर मामला ऊपर भेज दिया है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह फैसला न केवल इन नौ दलों के लिए, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.