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छत्तीसगढ़ की 'लट्ठमार' होली: यहाँ लाठियां खाने से दूर होती हैं बीमारियां

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02 मार्च 2026, 03:23 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

लठ्ठमार होली- जांजगीर
लठ्ठमार होली- जांजगीर

जांजगीर । डेस्क: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में होली का एक ऐसा रंग देखने को मिलता है जो उत्तर प्रदेश के बरसाने की प्रसिद्ध लट्ठमार होली की जीवंत झलक पेश करता है. जिले के पंतोरा गांव में पिछले तीन सौ वर्षों से एक अनूठी परंपरा बदस्तूर जारी है, जहाँ रंगों के साथ-साथ लाठियों की गूँज भी सुनाई देती है. 


इस खास उत्सव में गांव की कुंवारी कन्याएं पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं. परंपरा के अनुसार, इस आयोजन की शुरुआत गांव के प्राचीन मां भवानी मंदिर से होती है, जहाँ सबसे पहले देवी-देवताओं पर प्रतीकात्मक रूप से छड़ी चलाकर आशीर्वाद लिया जाता है, जिसके बाद पूरे गांव में लाठियों वाली होली का सिलसिला शुरू होता है.

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स्थानीय निवासियों का इस परंपरा पर अटूट विश्वास है. क्षेत्र में यह मान्यता गहरे तक जमी हुई है कि होली के इस अवसर पर लाठियों की मार सहने से शरीर निरोगी रहता है और साल भर कोई भी गंभीर बीमारी व्यक्ति के करीब नहीं फटकती. 


यही वजह है कि पुरुष इस प्रहार से बचने के बजाय सहर्ष लाठियां खाते हैं. तीन शताब्दियों से चली आ रही यह रस्म न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है, बल्कि यह श्रद्धा और लोक-आस्था का एक अनूठा संगम भी बन गई है, जिसे देखने के लिए आस-पास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं.


गौरतलब है कि बरसाने की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली मुख्य रूप से राधा रानी और भगवान कृष्ण के प्रेम का प्रतीक मानी जाती है, जिसकी जड़ें द्वापर युग की पौराणिक कथाओं से जुड़ी हैं. 

मान्यता है कि कृष्ण अपने सखाओं के साथ नंदगांव से बरसाने जाकर राधा और उनकी सखियों को चिढ़ाते थे, जिसके जवाब में गोपियां उन्हें लाठियों से भगाती थीं. 


आज भी यह परंपरा वैसी ही जीवंत है, जहाँ फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को नंदगांव के पुरुष (होरियारे) ढाल लेकर बरसाने पहुँचते हैं और वहाँ की महिलाएं (हुरियारिनें) उन पर प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाती हैं. 


इस दौरान पुरुष खुद को ढाल से बचाते हैं और हंसी-मजाक व गीतों का दौर चलता है. यह केवल एक खेल नहीं बल्कि भक्ति और अटूट लोक परंपरा का हिस्सा है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु और पर्यटक मथुरा के इस अंचल में उमड़ते हैं. टेसू के फूलों से बने रंगों और गुलाल के बीच खेली जाने वाली यह होली नारी शक्ति के स्वाभिमान और प्रेम के उल्लास को एक साथ प्रदर्शित करती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP