यूरेनियम, निजी क्षेत्र को खनन-आयात की अनुमति मिलेगी
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने देश में परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार, सरकार निजी कंपनियों को यूरेनियम के खनन और आयात की अनुमति देने की तैयारी कर रही है.
अभी तक इस रेडियोधर्मी खनिज पर सख्त सरकारी नियंत्रण रहा है, और केवल सरकारी कंपनियां ही इसे खनन, आयात और प्रसंस्करण कर सकती थीं. यह कदम परमाणु हथियारों के दुरुपयोग और रेडियोधर्मी क्षति को रोकने के साथ-साथ देश की रणनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था.
हालांकि, अब मोदी सरकार इस नीति में बदलाव करने जा रही है.
सूत्रों का दावा है कि सरकार का लक्ष्य 2047 तक, जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मना रहा होगा, परमाणु ऊर्जा उत्पादन को वर्तमान की तुलना में 12 गुना बढ़ाना है. यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत की कुल बिजली मांग का 5% हिस्सा परमाणु ऊर्जा से पूरा होगा.
इस संबंध में बजट में घोषणा की गई थी, और चालू वित्त वर्ष में ही इसकी नीति पेश की जा सकती है. हालांकि, वित्त मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
इससे पहले, सरकार ने विदेशी कंपनियों के लिए भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में भागीदारी खरीदने की शर्तों को शिथिल करने की बात कही थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में लगभग 76,000 टन यूरेनियम भंडार है, जो 10,000 मेगावाट के परमाणु संयंत्र को 30 वर्षों तक बिजली उत्पादन में सहायता कर सकता है. लेकिन, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह से केवल 25% बिजली उत्पादन संभव है.
इसलिए, देश को यूरेनियम आयात करना होगा और उसकी शोधन क्षमता को बढ़ाना होगा.