कैथोलिक चर्च ने संपत्तियों के सरकारी अधिग्रहण के प्रावधान को बताया अलोकतांत्रिक
नई दिल्ली । डेस्क: कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का कड़ा विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया है. शनिवार को एक प्रेस वार्ता में CBCI के उप महासचिव मैथ्यू कोयिकल ने विधेयक के उन प्रावधानों पर गहरी चिंता जताई, जो पंजीकरण रद्द होने, सरेंडर करने या समय पर नवीनीकरण न होने की स्थिति में केंद्र सरकार को गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और अल्पसंख्यक संस्थानों की संपत्तियों, धन और संपदा को अपने नियंत्रण में लेने का अधिकार देते हैं.
कोयिकल ने चेतावनी दी कि ये "दमनकारी" उपाय अधिकारियों को विवेकाधीन शक्तियां प्रदान करते हैं, जिससे कार्यकारी अतिरेक और संवैधानिक स्वतंत्रताओं के हनन का खतरा बढ़ जाता है.
हालांकि, इस विरोध के बीच चर्च के पिछले साल के वक्फ (संशोधन) अधिनियम के समर्थन पर सवाल उठने लगे हैं. पिछले साल जब वक्फ संपत्तियों पर मुस्लिम समुदाय के नियंत्रण को कम करने वाले कानून का विरोध हो रहा था, तब केरल के मुनंबम भूमि विवाद के कारण CBCI ने उस संशोधन का समर्थन किया था.
अब विपक्षी सांसदों और खुद ईसाई समुदाय के जनप्रतिनिधियों ने चर्च के इस 'दोहरे मापदंड' पर आपत्ति जताई है.
सांसदों का कहना है कि जब चर्च ने वक्फ विवाद में राज्य के हस्तक्षेप का समर्थन किया था, तभी उन्हें सचेत किया गया था कि यह मिसाल आगे चलकर ईसाई धर्मार्थ संस्थानों के लिए भी घातक हो सकती है. फिलहाल, CBCI ने मांग की है कि सरकार विधेयक से संपत्ति अधिग्रहण जैसे विवादित प्रावधानों को हटाए और एक अपीलीय प्राधिकरण का गठन करे.