दो चुनाव आयुक्तों की व्यक्तिगत शिकायत पर कैबिनेट सचिवालय का एक्शन से इनकार
सीनियर डीईसी मनीष गर्ग द्वारा बिना अनुमति कार्य आवंटन बदलने पर दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था. हालांकि, कैबिनेट सचिवालय ने इसे व्यक्तिगत शिकायत मानते हुए फिलहाल कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है.
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के चुनाव आयोग (ECI) में तैनात सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (Sr. DEC) मनीष गर्ग के खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों द्वारा भेजी गई शिकायत पर कैबिनेट सचिवालय ने कोई भी सीधी कार्रवाई करने से स्पष्ट मना कर दिया है. आरटीआई (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय का मानना है कि पूरा आयोग जब तक आधिकारिक रूप से कोई पत्र नहीं भेजता, तब तक व्यक्तिगत स्तर पर मिली शिकायत पर कदम उठाना संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप हो सकता है.
आयोग की स्वायत्तता और नियमों का हवाला
कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को भेजे गए एक नोट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, जिसे कार्यपालिका के प्रभाव से दूर रखने के लिए ही विशेष ढांचा दिया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुसार, आयोग का कामकाज सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर तय होता है. ऐसे में दो आयुक्तों की ओर से अलग-अलग भेजी गई चिट्ठियों को आयोग का अंतिम या आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता. इसी वजह से सचिवालय ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप को अनुचित ठहराया है.
कार्य आवंटन से शुरू हुआ था पूरा विवाद
यह पूरा मामला वरिष्ठ अधिकारी मनीष गर्ग द्वारा जारी एक कार्य आवंटन आदेश से जुड़ा है. आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग या आयुक्तों से बिना किसी पूर्व चर्चा या मंजूरी के वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों और जिम्मेदारियों में फेरबदल कर दिया था. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखकर इस पर कड़ा ऐतराज जताया था. आयुक्तों का कहना था कि बार-बार मौखिक और लिखित निर्देश देने के बावजूद इस तरह का कदम उठाया गया, जो स्थापित परंपराओं और 2023 के अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है.
भविष्य के रिकॉर्ड के लिए दर्ज हुई शिकायत
हालांकि कैबिनेट सचिवालय ने इस वक्त सीधे तौर पर कोई अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की है, लेकिन मामले को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया गया है. कैबिनेट सचिव ने दोनों चुनाव आयुक्तों को पत्र की प्राप्ति की सूचना देने के साथ ही इसकी एक प्रति कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और स्थापना अधिकारी को भी भेजी है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में इस पत्राचार को दर्ज रखा जाए, ताकि भविष्य में उनकी तैनाती या पदोन्नति से जुड़े फैसलों में इस घटनाक्रम को ध्यान में रखा जा सके.