BRS और BJD करेंगे उपराष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार
नई दिल्ली । डेस्क: तेलंगाना और ओडिशा की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और बीजू जनता दल (बीजेडी) ने मंगलवार को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा न लेने का फैसला किया है. दोनों दलों ने सोमवार को यह घोषणा की कि उनके सांसद इस मतदान प्रक्रिया से दूर रहेंगे.
तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (जिन्हें केसीआर के नाम से जाना जाता है) के बेटे और बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने पार्टी के इस फैसले की घोषणा की. दूसरी ओर, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की ओर से बीजेडी के राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) के सदस्य और सांसद सस्मित पात्रा ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया.
के. टी. रामा राव ने कहा, "तेलंगाना में यूरिया की कमी के कारण किसान भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं. उनके प्रति एकजुटता दिखाने के लिए हमारी पार्टी 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी." उन्होंने आगे कहा, "अगर उपराष्ट्रपति चुनाव में नोटा (कोई भी नहीं) का विकल्प होता, तो बीआरएस उसका उपयोग करती."
वहीं, सस्मित पात्रा ने कहा, "हम बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन, दोनों से समान दूरी बनाए रखना चाहते हैं. हमारा पूरा ध्यान ओडिशा और इसके साढ़े चार करोड़ लोगों के विकास पर है."
स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मानसून सत्र के पहले दिन अचानक इस्तीफा दे दिया था. उनके उत्तराधिकारी का चयन करने के लिए मंगलवार को मतदान हो रहा है. विजयी उम्मीदवार अगले पांच वर्षों तक, यानी पूरे कार्यकाल के लिए यह जिम्मेदारी संभालेगा.
इस चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन और 'इंडिया' गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी (सेवानिवृत्त न्यायाधीश) के बीच मुकाबला है.
उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद अपने पहले और दूसरे पसंद के उम्मीदवार को वोट देते हैं. यदि दोनों उम्मीदवारों को पहले पसंद के वोट बराबर मिलते हैं, तो दूसरे पसंद के वोट गिने जाते हैं.
संसदीय गणित के हिसाब से राधाकृष्णन को कुछ बढ़त है. एनडीए के सहयोगियों के अलावा, आंध्र प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने भी उनका समर्थन किया है.