BRICS शिखर सम्मेलन: खाड़ी तनाव के बीच संयुक्त घोषणापत्र पर बनी सहमति
नई दिल्ली । डेस्क: नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच एक संयुक्त घोषणापत्र को लेकर सहमति बन गई है. यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष जारी है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मंच पर इस आर्थिक समूह के प्रभाव को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की मांग को आगे बढ़ाना है.
इस शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं.
कूटनीतिक दृष्टिकोण से यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि भारत अमेरिका, रूस, ईरान और खाड़ी देशों के साथ अपने संतुलित संबंधों को बनाए रखते हुए व्यापार सहयोग और आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है.
सूत्रों के अनुसार, महीनों से जारी क्षेत्रीय मतभेदों के बावजूद कूटनीतिज्ञ एक साझा दस्तावेज तैयार करने में सफल रहे हैं, जिसमें किसी देश का प्रत्यक्ष नाम लिए बिना एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों की निंदा की जाने की संभावना है.
यह समझौता ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सदस्यों के बीच हालिया तनाव को देखते हुए एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है. मई में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इन्हीं मतभेदों के कारण कोई साझा बयान जारी नहीं हो सका था.
यह संयुक्त घोषणापत्र भले ही मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य को तुरंत न बदले, लेकिन यह पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों और नीतियों के खिलाफ उभरती अर्थव्यवस्थाओं की एकजुटता को रेखांकित करता है.
वर्ष 2009 में गठित BRICS समूह अब विश्व की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो विश्व बैंक और आईएमएफ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक समावेशी और संतुलित व्यवस्था की वकालत कर रहा है.