बोत्सवाना ने इंडियन फार्माकोपिया को मान्यता दी
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, बोत्सवाना इंडियन फार्माकोपिया (IP) को दवाओं के लिए मानकों की पुस्तक के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता देने वाला 18वां देश बन गया है. यह कदम बोत्सवाना में भारतीय दवाओं की गुणवत्ता और सामर्थ्य को मान्यता देता है, जिससे दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.
यह ऐतिहासिक समझौता 12 नवंबर, 2025 को बोत्सवाना के गैबोरोन में राष्ट्रपति कार्यालय में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और बोत्सवाना के राष्ट्रपति एडवोकेट डूमा गिदोन बोको के बीच हस्ताक्षरित किया गया. यह भारत के किसी राष्ट्रपति की बोत्सवाना की पहली यात्रा थी.
इस मान्यता से अब भारतीय फार्मा कंपनियों को बोत्सवाना में अपनी दवाओं के लिए दोहरी जाँच, परीक्षणों के दोहराव और आयात के बाद की जाँचों से मुक्ति मिलेगी. इससे भारतीय फार्मा निर्यात को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. यह कदम भारत की मज़बूत वैज्ञानिक और नियामक प्रणालियों में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे को भी दर्शाता है.
राष्ट्रपति मुर्मू ने बोत्सवाना सरकार के अनुरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, बोत्सवाना को आवश्यक एंटी-रेट्रोवायरल (ARV) दवाएं प्रदान करने के भारत के निर्णय की भी घोषणा की.
यह समझौता भारत की छवि को अफ्रीका में एक भरोसेमंद विकास भागीदार के रूप में मजबूत करने के लिए तैयार है, खासकर स्वास्थ्य और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों में. बोत्सवाना से पहले, अफगानिस्तान (2019 में पहला), घाना, नेपाल, मॉरीशस, सूरीनाम, निकारागुआ, भूटान, मोजाम्बिक, सोलोमन आइलैंड्स, श्रीलंका, नाउरू, मलावी, गुयाना, फिजी, क्यूबा, मालदीव और त्रिनिदाद और टोबैगो सहित 17 अन्य देशों ने IP को मान्यता दी है.
यह सहयोग दोनों राष्ट्रों के राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के करीब आने पर स्वास्थ्य क्षेत्र में साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.
इंडियन फार्माकोपिया (IP) क्या है?
इंडियन फार्माकोपिया (IP) को भारत में बेची जाने वाली या आयात की जाने वाली सभी दवाओं के लिए "मानकों की आधिकारिक किताब" या "गुणवत्ता की बाइबिल" माना जाता है. यह एक कानूनी रूप से मान्य तकनीकी दस्तावेज़ है जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों को मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता, पहचान और शुद्धता सुनिश्चित करना है.
इस किताब में हर दवा के लिए यह निर्धारित किया जाता है कि उसे बनाने में किन मानकों का पालन करना है, उसकी रासायनिक संरचना क्या होगी, उसकी शुद्धता और असर करने की ताक़त (Potency) कितनी होनी चाहिए, और प्रयोगशालाओं में उसकी जाँच कैसे की जाएगी.
इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत कार्य करती है. भारत में, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत सभी दवा निर्माताओं के लिए IP में दिए गए मानकों का पालन करना अनिवार्य है, जो देश के दवा बाज़ार में सुरक्षा और प्रभावशीलता का कानूनी आधार प्रदान करता है.
जब बोत्सवाना जैसे विदेशी देश IP को आधिकारिक तौर पर मान्यता देते हैं, तो यह भारतीय वैज्ञानिक और नियामक प्रणालियों में उनके गहरे भरोसे को दर्शाता है, जिससे भारतीय दवा उद्योग का वैश्विक निर्यात बढ़ता है और अनावश्यक दोहरी जाँच की आवश्यकता समाप्त हो जाती है.