भूपेश बघेल ने पूछा- महादेव ऐप का असली मालिक कौन, शुभम सोनी या सौरभ चंद्राकर?
ओमान से सौरभ चंद्राकर के भारत लाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऐप की असली मालिकाना हक पर सवाल उठाते हुए ईडी और सीबीआई से स्थिति साफ करने की मांग की है.
रायपुर । संवाददाता: महादेव सट्टा ऐप के कथित सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ही इस गैर-कानूनी सट्टा सिंडिकेट के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई की शुरुआत की थी.
उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने साल 2022 में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े 72 एफआईआर दर्ज किए थे और 2023 की शुरुआत में ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने की मांग की थी.
जांच पर सवाल उठाते हुए भूपेश बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से यह स्पष्ट करने को कहा कि महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफॉर्म का असली नियंत्रण किसके पास था—सौरभ चंद्राकर या एक अन्य आरोपी शुभम सोनी.
बघेल ने 2023 के विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान जारी एक वीडियो का हवाला दिया, जिसमें शुभम सोनी ने खुद को महादेव सट्टा प्लेटफॉर्म का मालिक बताया था और चंद्राकर को अपना कर्मचारी कहा था. बघेल ने आरोप लगाया कि शुभम सोनी का वीडियो ईडी ने हासिल किया और उसे बीजेपी दफ्तर से जारी किया गया.
उन्होंने सवाल किया कि जब सोनी खुद को मालिक बता रहा था, तो अब ईडी चंद्राकर को प्रमोटर बताकर कार्रवाई क्यों कर रही है?
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दावा किया है कि चंद्राकर से पूछताछ के बाद यह साफ हो जाएगा कि इस सट्टा सिंडिकेट से किसे संरक्षण राशि (प्रोटेक्शन मनी) मिलती थी.
गौरतलब है कि भूपेश बघेल पर मार्च 2024 में ईओडब्ल्यू और दिसंबर 2024 में सीबीआई द्वारा मामला दर्ज किया गया था, जिसमें उन्हें घोटाले के लाभार्थियों में से एक बताया गया है. इस पर बघेल ने कहा कि जांच एजेंसियां वही करेंगी जो सरकार चाहेगी, लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है.
सीबीआई टीम द्वारा रविवार को ओमान से भारत लाए गए सौरभ चंद्राकर पर दो सीबीआई मामले और एक ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामला दर्ज है. सीबीआई के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफॉर्म भारत भर में फ्रेंचाइज्ड पैनलों के जरिए अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क चलाता था, जिसकी कमाई को मूल बैंक खातों और हवाला चैनलों के माध्यम से भेजा जाता था.
इस मामले में ईडी ने अपराध से हुई अनुमानित आय लगभग 6,000 करोड़ रुपये बताई है.