बैतूल में जहरीली कफ सिरप से दो और बच्चों की मौत; डॉक्टर गिरफ्तार
भोपाल । डेस्क: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में दो बच्चों की मौत जहरीली कफ सिरप 'कोल्ड्रिफ' के सेवन से होने का मामला सामने आया है. सिरप में 48.6% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) नामक अत्यंत विषाक्त पदार्थ पाया गया, जो विशेष रूप से बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है.
किडनी फेलियर के कारण हुई इन मौतों के साथ राज्य में कुल मौतों की संख्या 16 हो गई है. इसमें छिंदवाड़ा जिले के 14 मामले शामिल हैं परासिया उपमंडल में 11, छिंदवाड़ा शहर में 2 और चौऱाई तहसील में 1 मौत.
बैतूल के अमला तहसील में 8 सितंबर और 1 अक्टूबर को हुई इन मौतों के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है. सरकार के डॉक्टर डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर बच्चों को जानते हुए भी जहरीले सिरप का पर्चा लिखने का आरोप है.
डॉ. सोनी पर सरकारी नौकरी के साथ निजी प्रैक्टिस करने का भी आरोप है. छिंदवाड़ा एसपी अजय पांडेय के अनुसार, डॉ. सोनी को शनिवार रात को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें तत्काल निलंबित कर जबलपुर के क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा निदेशक कार्यालय से संबद्ध कर दिया.
पुलिस ने तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित निर्माता कंपनी 'स्रेसन फार्मास्युटिकल्स' के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को घोषणा की थी कि सरकार इस घटना को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
एसपी पांडेय ने बताया कि परासिया थाने में मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 276 (दवाओं की मिलावट) और 105 (हत्या न होने वाला दोषसिद्ध हत्या) के तहत दर्ज किया गया है.
इन धाराओं में क्रमशः एक वर्ष और 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है. इसके अलावा, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 27ए के तहत भी आरोप लगाया गया है, जिसमें मिलावटी दवा से मौत होने पर 10 वर्ष से अधिक कारावास या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.
कोतवाली पुलिस की एक विशेष टीम ने शनिवार रात छिंदवाड़ा के राजपाल चौक से डॉ. सोनी को गिरफ्तार किया. एसपी ने कहा कि डॉक्टर ने सिरप के हानिकारक प्रभावों को जानते हुए भी लगभग एक माह तक बच्चों को यह दवा लिखी, जो घोर लापरवाही का उदाहरण है. कंपनी पर भी दूषित दवा सप्लाई करने का आरोप है.
अमला तहसील के दो बच्चे चार वर्षीय कबीर (कमलेश का पुत्र, कलमेश्वर गांव) और ढाई वर्षीय गार्मित (निखलेस का पुत्र, जामुन बिच्छुआ गांव) को बुखार के इलाज के लिए छिंदवाड़ा के परासिया ले जाया गया था, जहां उनकी हालत बिगड़ गई.
कबीर के परिवार ने आरोप लगाया कि डॉ. सोनी द्वारा लिखे गए कोल्ड्रिफ सिरप के सेवन के बाद 24 अगस्त को इलाज शुरू होने के बाद उसकी हालत खराब हुई. 8 सितंबर को भोपाल में उसकी मौत हो गई. परासिया के दो अन्य डॉक्टरों ने किडनी की जटिलताओं का संकेत दिया था, जिसके बाद उसे नागपुर और फिर भोपाल ले जाया गया.
दूसरे बच्चे गार्मित की 1 अक्टूबर को उसके गांव में इलाज के दौरान मौत हो गई. उसके परिवार ने भी पहले डॉ. सोनी से सलाह ली थी.
अमला ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अशोक नरवर ने बताया कि दोनों बच्चों में किडनी फेलियर के लक्षण जैसे पेट फूलना दिखे और उन्हें बेटूल से भोपाल रेफर किया गया. पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ, लेकिन गंभीर किडनी जटिलताओं की रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को भेजी गई.
अमला एसडीएम शैलेंद्र बडोनिया ने मौतों की पुष्टि की और कहा कि प्रशासन मामलों की विस्तृत जानकारी एकत्र कर रहा है.