कैलिफोर्निया में अरबपति टैक्स पर छिड़ी जंग
सैन फ्रांसिस्को । डेस्क: संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में इन दिनों एक अभूतपूर्व आर्थिक और सामाजिक संघर्ष देखने को मिल रहा है, जिसने राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था को दो फाड़ कर दिया है. इस विवाद की जड़ में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जुलाई 2025 में पारित किया गया 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट' (OBBBA) और उसके जवाब में कैलिफोर्निया के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा प्रस्तावित 'अरबपति टैक्स' है.
ट्रंप के इस नए संघीय कानून ने कैलिफोर्निया के 'मेडी-कल' (Medi-Cal) कार्यक्रम के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता में भारी कटौती कर दी है, जिससे राज्य के करीब 1.45 करोड़ लाभार्थियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. विशेष रूप से डाउन सिंड्रोम जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों और ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए हर छह महीने में पात्रता साबित करने वाली कागजी कार्रवाई एक बड़ी बाधा बन गई है. एंटेलोप वैली के एक अस्पताल में कार्यरत करेन सांचेज़ जैसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता अब इन मरीजों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि जटिल नियमों के कारण कई जरूरतमंद इस सुरक्षा कवच से बाहर हो सकते हैं.
इस वित्तीय घाटे की भरपाई के लिए 'सर्विस एम्प्लॉइज इंटरनेशनल यूनियन' (SEIU-UHW) ने राज्य के उन अरबपतियों पर 5 प्रतिशत का एकमुश्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिनकी संपत्ति 1 अरब डॉलर से अधिक है. इस मुहिम को धार देने के लिए वर्मोंट के सीनेटर बर्नी सैंडर्स लॉस एंजिल्स में एक विशाल रैली के माध्यम से 8.75 लाख हस्ताक्षर जुटाने का अभियान शुरू कर रहे हैं, ताकि इस प्रस्ताव को नवंबर के मध्यावधि चुनावों में मतदान के लिए रखा जा सके.
यदि यह कानून पास होता है, तो इसे 1 जनवरी 2025 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किया जाएगा. हालांकि, इस प्रस्ताव ने सिलिकॉन वैली के दिग्गजों और व्यापारिक संगठनों में खलबली मचा दी है. गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन जैसे अरबपतियों द्वारा फ्लोरिडा जैसे कम टैक्स वाले राज्यों में अपने ठिकाने और कंपनियां स्थानांतरित करने की खबरें पहले ही सुर्खियां बन चुकी हैं. फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के भी मियामी में संपत्ति खरीदने की चर्चाएं हैं, जिसे इस संभावित टैक्स से बचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि यह टैक्स केवल अरबपतियों पर नहीं, बल्कि कैलिफोर्निया की पूरी अर्थव्यवस्था पर हमला है. 'बे एरिया काउंसिल' और 'कैलिफोर्निया बिजनेस राउंडटेबल' जैसे समूहों का मानना है कि इससे राज्य के सफल उद्यमियों में डर पैदा होगा और वे निवेश कम कर देंगे, जिससे रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं पर बुरा असर पड़ेगा.
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अरबपतियों के पलायन से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हो सकता है, जो पहले से ही 3 अरब डॉलर के बजटीय घाटे से जूझ रहा है. दूसरी ओर, कानून के समर्थकों का कहना है कि कैलिफोर्निया की अपार संपत्ति के पीछे गहरी गरीबी छिपी है और इस संकट के समय में अमीरों को अपना योगदान देना चाहिए.
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर डेरियन शांस्के जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि आय कर (Income Tax) अल्ट्रा-अमीर लोगों तक पहुंचने में विफल रहा है, इसलिए संपत्ति आधारित टैक्स (Wealth Tax) जरूरी है. वे दलील देते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली राज्य को और भी कम आकर्षक बना देगी.
राजनीतिक रूप से यह मुद्दा बेहद संवेदनशील हो गया है. गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने फिलहाल इस मतपत्र उपाय से दूरी बना ली है, क्योंकि उन्हें डर है कि अरबपतियों का पलायन राज्य की वित्तीय स्थिति को अस्थिर कर सकता है.
हालांकि, जनमत सर्वेक्षणों में जनता का रुख अलग दिख रहा है. 2025 के एक हैरिस पोल के अनुसार, करीब 71 प्रतिशत लोग वेल्थ टैक्स का समर्थन करते हैं. कैलिफोर्निया में किए गए हालिया सर्वेक्षण बताते हैं कि 48 प्रतिशत निवासी इस टैक्स के पक्ष में हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही यह उपाय मतपत्र तक पहुंच जाए, लेकिन इसे कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है.
फिलहाल, करेन सांचेज़ जैसे हजारों कार्यकर्ता रात-दिन हस्ताक्षर जुटाने में लगे हैं, जबकि दूसरी ओर अरबपति इस टैक्स के खिलाफ करोड़ों डॉलर का फंड जुटा रहे हैं. कैलिफोर्निया, जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का गौरव रखता है, अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां उसे अपने सामाजिक कल्याण और आर्थिक नेतृत्व के बीच एक कठिन संतुलन बनाना होगा.