बस्तर दशहराः रथ के लिए पेड़ों की कटाई पर पंचायत की रोक
छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहराः रथ निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर रोक
बस्तर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर में 75 दिनों तक मनाए जाने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की 600 साल पुरानी परंपरा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. दरअसल इस पर्व में मुख्य आकर्षण का केंद्र लकड़ियों से बना विशालकाय 8 चक्कों का रथ होता है. इस रथ के निर्माण के लिए जरूरी लकड़ियों की कटाई पर बस्तर जिले के तिरिया ग्राम पंचायत ने रोक लगा दी है.
इस पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि दशहरा के लिये रथ निर्माण के नाम पर जंगल से हर साल बेतहाशा लकड़ियों की कटाई की जा रही है, जिससे लगातार जंगल घट रहे है.
इसलिए तिरिया पंचायत ने ग्राम सभा आयोजित कर यह निर्णय लिया है कि दशहरा रथ निर्माण के लिए तिरिया पंचायत से वृक्षों की कटाई नहीं करने दी जाएगी. ग्राम पंचायत ने इसकी जानकारी दशहरा समिति अध्यक्ष व बस्तर के सांसद महेश कश्यप के साथ बस्तर कलेक्टर और विधायक किरण देव को भी दी है.
दरअसल दशहरा समिति के द्वारा 8 चक्कों के विशालकाय रथ निर्माण के लिए ढाई से तीन मीटर मोटाई वाले 80 से 100 साल तक के पुराने 70 से 80 वृक्ष कटवाए जाते हैं.
जंगल से 100 -130 घन मीटर लकड़ी काटकर शहर के सिरहासार चौक में रथ का निर्माण शुरू किया जाता है.
तिरिया पंचायत के ग्रामीणों का विरोध इस बात पर है कि दशहरा के नाम पर अनावश्यक वनों की कटाई हो रही है और नये जंगल के विकास के लिए प्रशासन के पास कोई योजना नहीं है. इस वजह से जंगल लगातार सिमटता जा रहा है.
ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित कर लिया फैसला
हर साल बस्तर जिले के अलग-अलग जंगलों से रथ निर्माण के लिए वनों की कटाई की जाती है. इस बार जिला प्रशासन ने रथ निर्माण के लिये जगदलपुर वन परिक्षेत्र के तिरिया जंगल से वृक्षों की कटाई का फैसला लिया था, लेकिन तिरिया ग्राम पंचायत ने अपने जंगल क्षेत्र से वृक्ष की कटाई करने पर रोक लगा दी है.
तिरिया के सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मंगतू कश्यप ने कहा कि रथ निर्माण के नाम पर लगातार पेड़ों की कटाई की गई है, जिससे जंगल उजड़ रहा है.
उन्होंने बताया कि ग्राम सभा तिरिया को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार अंतर्गत 3057.78 हेक्टेयर क्षेत्र प्राप्त हुआ है.
वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 4(1) और (च) के अंतर्गत ग्राम सभा द्वारा सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना तैयार की गई है.
इस योजना के अनुसार ग्राम सभा अपने जंगलों का संरक्षण, संवर्धन, प्रबंधन और सतत उपयोग कर सकती है.
वहीं गांव के फैसले को लेकर सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति तिरिया के सचिव बलिराम कश्यप ने बताया कि रथ निर्माण के नाम पर हर साल कई पुराने पेड़ों को काट दिया जाता है, जिससे जंगल समाप्त हो रहा है और यह सही नहीं है.
यही वजह है कि पूरे गांव वालों ने ग्राम सभा कर इस फैसले को प्रस्तावित किया है कि अब वह अपने जंगलों से रथ निर्माण के नाम पर पेड़ों की कटाई नहीं करने देंगे.
यह है परंपरा
बस्तर में 600 सालों से विश्व प्रसिद्ध दशहरा पर्व मनाया जाता रहा है.
इस पर्व में 12 से अधिक अद्भुत रस्में निभाई जाती हैं. एक तरफ जहां दशहरा (विजयदशमी) के दिन देश के विभिन्न हिस्सों में रावण का पुतला दहन किया जाता है, लेकिन इसके विपरीत छत्तीसगढ़ के बस्तर में इस दिन मां दंतेश्वरी देवी के छत्र और डोली को 8 चक्कों के विशालकाय रथ में रथारूढ़ कर शहर में परिक्रमा लगाने की परंपरा चली आ रही है.
इस रथ निर्माण के लिए 80 से 100 वर्ष पुराने 70 से 80 वृक्षों की कटाई की जाती है. दशहरा से 1 महीने पहले ही इन वृक्षों को काटकर रथ निर्माण का कार्य शुरू किया जाता है.
ग्रामीणों से इस मामले पर की जाएगी चर्चा
इस मामले में बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष और सांसद महेश कश्यप का कहना है कि यह अच्छी बात है कि ग्रामीण अपने जल जंगल जमीन के प्रति काफी जागरुक हैं. लेकिन सिर्फ रथ निर्माण के लिये वृक्षों की कटाई से जंगल खत्म हो जाएगा ऐसा नहीं है.
बस्तर की यह पुरानी परंपरा है. इस मामले में जरूर तिरिया पंचायत के ग्रामीणों से बातचीत की जाएगी. वहीं सांसद ने कहा कि पिछले 2 सालों से दशहरा वन का चयन भी किया गया है, जहां समिति के द्वारा पौधारोपण भी किया जाता है.
आने वाले समय में जरूर इसका फायदा भी मिलेगा, फिलहाल तिरिया पंचायत के ग्रामीणों से बातचीत की जाएगी और 600 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन जरूर किया जाएगा.