अर्जेंटीना के तीन हीरो- चे ग्वेरा, माराडोना और मेसी
रायपुर । सीजीखबर डेस्क: अर्जेंटीना की धरती ने दुनिया को ऐसे नायक दिए हैं जिन्होंने अपनी सीमाओं को लांघकर पूरी मानवता के दिलों पर राज किया है. इतिहास गवाह है कि जब-जब इस देश का नाम लिया जाता है, तब-तब दुनिया के जेहन में तीन सबसे बड़े नाम उभरते हैं- चे ग्वेरा, डिएगो माराडोना और अब लियोनेल मेसी. इन तीनों नायकों के प्रति दुनिया की दीवानगी इस कदर है कि समय बदलने के बाद भी इनका जादू कभी कम नहीं होता.
वर्तमान में टेक्सास के डलास स्टेडियम में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने जो करिश्मा किया है, उसने इस त्रिमूर्ति की महानता को एक नया आयाम दे दिया है. छह विश्व कप खेलने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने मेसी ने ऑस्ट्रिया के खिलाफ ग्रुप जे के मुकाबले में दो ऐतिहासिक गोल दागकर विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा 18 गोल करने का महा-रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है.
मेसी के इस जादुई प्रदर्शन ने अर्जेंटीना को विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में पहुंचा दिया है, लेकिन इसके साथ ही इसने अर्जेंटीना के उस गौरवशाली इतिहास को भी जीवंत कर दिया है जो चे ग्वेरा और माराडोना की विरासत से जुड़ा है.
अर्जेंटीना की इस महान त्रिमूर्ति में सबसे पहला नाम अर्नेस्टो 'चे' ग्वेरा का आता है, जिनकी दीवानी पूरी दुनिया है. अर्जेंटीना में जन्मे चे ग्वेरा को एक क्रांतिकारी राजनीतिज्ञ, विचारक और कूटनीतिज्ञ के रूप में जाना जाता है. उन्होंने क्यूबा की क्रांति में फिदेल कास्त्रो का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया था और अन्याय के खिलाफ लड़ाई का वैश्विक प्रतीक बन गए थे.
आज भी दुनिया में सबसे ज्यादा टी-शर्ट चे ग्वेरा के चेहरे वाली ही बिकती हैं, जो यह साबित करता है कि युवाओं के दिलों में उनके प्रति कितनी गहरी दीवानगी है. चे ग्वेरा के बाद अर्जेंटीना की धरती से फुटबॉल के जादूगर डिएगो माराडोना का उदय हुआ, जिन्होंने खेल के मैदान को ही अपनी क्रांति का मैदान बना दिया. माराडोना सिर्फ एक फुटबॉलर नहीं थे, बल्कि वे अर्जेंटीना की अस्मिता और संघर्ष के प्रतीक थे.
माराडोना खुद चे ग्वेरा के विचारों से इस कदर प्रभावित थे कि उन्होंने अपने दाहिने बाजू पर चे ग्वेरा का फोटो गुदवा रखा था, जो अर्जेंटीना के इन दो महानायकों के वैचारिक जुड़ाव को दर्शाता है. जहां चे ग्वेरा ने राजनीति और क्रांति के जरिए दुनिया को प्रभावित किया, वहीं माराडोना ने फुटबॉल के मैदान पर अपने जादुई खेल से दुनिया को मंत्रमुग्ध किया.
अब इसी कड़ी में तीसरा और आधुनिक नाम लियोनेल मेसी का जुड़ चुका है, जिनके प्रति लोगों की दीवानगी आज सातवें आसमान पर है. करीब 39 साल की उम्र में भी मेसी जिस तरह मैदान पर इतिहास रच रहे हैं, उसने उन्हें माराडोना और चे ग्वेरा के समकक्ष खड़ा कर दिया है.
ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैच में जब मेसी ने अपने जादुई बाएं पैर से गेंद को नेट में डाला, तो डलास स्टेडियम में मौजूद 70 हजार से अधिक प्रशंसक 'मेसी-मेसी' के नारों से झूम उठे. मैच के शुरुआती पलों में एक पेनल्टी चूकने के बाद मेसी खुद से बहुत नाराज थे, लेकिन एक सच्चे अर्जेंटीनाई लड़ाके की तरह उन्होंने हार नहीं मानी. 38वें मिनट में पहला और फिर 95वें मिनट में दूसरा गोल दागकर उन्होंने जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोस के सबसे अधिक विश्व कप गोल के रिकॉर्ड को हमेशा के लिए पीछे छोड़ दिया.
अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी और दुनिया भर के खेल विशेषज्ञ मानते हैं कि मेसी का यह रूप उनके करियर का सबसे परिपक्व और सर्वश्रेष्ठ रूप है. वे मैदान पर भले ही कम दौड़ते हों, लेकिन उनका विजन और खेल की समझ आज भी अचूक है.
चे ग्वेरा की वैचारिक क्रांति और माराडोना के फुटबॉल के जादू को आगे बढ़ाते हुए मेसी ने अपनी कला से अर्जेंटीना का परचम पूरी दुनिया में लहराया है. इन तीनों नायकों ने यह साबित किया है कि अर्जेंटीना की मिट्टी में कुछ ऐसा है जो दुनिया को बदलने वाले और इतिहास रचने वाले महानायकों को जन्म देता है.