क्या देश में दो तरह के कानून हैं? अभिजीत दीपके
नई दिल्ली । डेस्क: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर विवादित नारेबाजी करने के आरोप में एक महिला आंदोलनकारी पर दर्ज हुई 'जीरो एफआईआर' के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है.
उन्होंने सरकार पर देश के युवाओं को निशाना बनाने और अपने नेताओं को छूट देने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि क्या देश में युवाओं और सत्ताधारी दल के लिए अलग-अलग कानून चल रहे हैं?
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर गाली-गलौज या आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, तो उन लोगों पर कार्रवाई कब होगी जो वर्षों से सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते आ रहे हैं.
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल से जुड़े अकाउंट्स पर निशाना साधते हुए कहा कि कई ऐसे प्रोफाइल हैं जो खुद को 'फॉलोव्ड बाय पीएम मोदी' लिखते हैं और लगातार महिलाओं के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं. दीपके ने मांग की कि सबसे पहले ऐसे लोगों और आईटी सेल पर मामले दर्ज होने चाहिए.
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए CJP नेता ने कहा कि अभद्र भाषा का इस्तेमाल केवल आईटी सेल तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के सांसद और बड़े नेता भी इसमें शामिल रहे हैं.
उन्होंने संसद में बसपा सांसद दानिश अली के खिलाफ भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी द्वारा की गई विवादित टिप्पणियों और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक पुराने कथित वीडियो का हवाला देते हुए पूछा कि क्या ऐसे मामलों में भी समान कानून लागू हुआ था?
दीपके ने तर्क दिया कि किसी के खिलाफ अपशब्द कहना गलत हो सकता है, लेकिन इस आधार पर युवाओं के खिलाफ सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज करने का क्या औचित्य है?
गौरतलब है कि नीट परीक्षा लीक मामले को लेकर 23 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान नोएडा निवासी 25 वर्षीय रुचिका सिंह पर प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सामाजिक शांति भंग करने के आरोप में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में 29 जुलाई को 'जीरो एफआईआर' दर्ज की गई है.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत दर्ज इस मामले को अब आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच के लिए दिल्ली पुलिस के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने स्थानांतरित कर दिया गया है. दिल्ली पुलिस के अनुसार, एफआईआर की कॉपी मिलने के बाद कानूनी सलाह लेकर और स्थापित नियमों के अनुसार निष्पक्ष जांच की जाएगी.