क्या क्यूबा की जनता संघर्ष करने के लिये तैयार है?
सीजीखबर डेस्क: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की बेदखली के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें क्यूबा पर टिकी हैं. सवाल केवल यह नहीं है कि क्यूबा की सरकार क्या करेगी, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि क्या आर्थिक तंगी और अभावों से जूझ रही क्यूबा की जनता एक और लंबे संघर्ष के लिए तैयार है?
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने सोशल मीडिया पर "खून की आखिरी बूंद तक रक्षा" करने का जो आह्वान किया है, वह धरातल पर कड़े इम्तिहान का सामना कर रहा है. दशकों से वेनेजुएला के रियायती तेल पर निर्भर क्यूबा के लिए अब ऊर्जा का वह स्रोत पूरी तरह बंद हो चुका है, जिससे देश के बिजली ग्रिड को जीवन मिलता था.
ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब क्यूबा को वेनेजुएला से कोई मदद नहीं मिलेगी. ऐसे में क्यूबा की जनता के सामने अब दोहरी चुनौती है एक तरफ अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव और दूसरी तरफ अपने ही घरों में पानी, बिजली और भोजन का भीषण अभाव.
क्यूबा अपनी बिजली जरूरतों के लिए वेनेजुएला से मिलने वाले रियायती तेल पर निर्भर रहा है, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वेनेजुएला से तेल और पैसे की यह आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी जाएगी. इस फैसले ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह चरमराने की कगार पर खड़ा कर दिया है, जो पहले से ही भोजन, दवाओं और बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत से जूझ रहा है.
हवाना की सड़कों पर पसरा सन्नाटा किसी बड़े तूफान से पहले की शांति जैसा है. संचार प्रोफेसर अमांडा टेरेरो के अनुसार, देश अनिश्चितता की गिरफ्त में है और लोग पलायन के लिए 'कंटीजेंसी प्लान' बना रहे हैं. क्यूबा की जनता के बीच संघर्ष को लेकर एक गहरा विभाजन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.
जहाँ एक वर्ग अमेरिकी हस्तक्षेप को क्यूबा की संप्रभुता पर हमला मानता है, वहीं सोशल मीडिया पर लोगों का एक बड़ा हिस्सा अब बदलाव के लिए बेताब है, भले ही वह बदलाव किसी भी रास्ते से आए.
28 वर्षीय वेब डिजाइनर ऐलेना गार्सिया जैसे युवाओं के लिए राष्ट्रभक्ति और रोजमर्रा की जरूरतें आपस में टकरा रही हैं. जब घर में हफ्ते भर से पानी न आया हो और 12-12 घंटे के ब्लैकआउट सामान्य बात हो जाएं, तो सरकार के "संघर्ष" के आह्वान पर जनता का भरोसा डगमगाने लगता है.
2021 में हुए ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन इस बात का प्रमाण थे कि क्यूबा की जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है और अब वेनेजुएला जैसा सहारा छिन जाने के बाद, आर्थिक संकट के चलते दोबारा जन-विद्रोह भड़कने की पूरी आशंका है.
अमेरिकी रणनीतिकार भी इसी दुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं. विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यूबा को चेतावनी दी है कि वे "पतन" की कगार पर हैं, लेकिन साथ ही वे स्थिरता की बात भी कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि क्यूबा में गृह युद्ध या अराजकता फैलने पर बड़े पैमाने पर शरणार्थी अमेरिका का रुख करेंगे.
क्यूबा की जनता के लिए संघर्ष अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गया है. टूर गाइड लाज़ारो गोमेज़ जैसे आम नागरिकों का मानना है कि क्यूबा को धमकाया जाना बर्दाश्त नहीं है, लेकिन वे यह भी जानते हैं कि बिना किसी 'डील' के आने वाला भविष्य अंधेरे और भूख से भरा हो सकता है.
फिलहाल, क्यूबा के घरों में लोग सरकार के नारों से ज्यादा जरूरी दवाओं और राशन के स्टॉक को तवज्जो दे रहे हैं. यह स्थिति दर्शाती है कि क्यूबा की जनता किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक संघर्ष में उतरने से पहले अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रही है, और राष्ट्रवाद के नारों से ज्यादा महत्वपूर्ण अब उनके लिए दो वक्त की रोटी और बिजली की रोशनी बन गई है.