छत्तीसगढ़ की लंबित रेल परियोजनाओं पर लगी मुहर
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और सामाजिक विकास को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार मिलकर राज्य के रेल नेटवर्क को मजबूत करने में जुट गई हैं. इसी सिलसिले में नई दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की और प्रदेश की कई महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की.
बातचीत के दौरान रेल मंत्री ने उत्तर छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए 244 किमी लंबी सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर, 301 किमी लंबी धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा और 200 किमी लंबी अंबिकापुर-बरवाडीह परियोजनाओं को जल्द से जल्द मंजूरी देने का भरोसा जताया है.
बैठक का एक प्रमुख केंद्र कटघोरा-डोंगरगढ़ के बीच बनने वाली लगभग 295 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन रही. रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में एक स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) बनाकर इस परियोजना को पूरा किया जाएगा.
करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ से गुजरने वाली यह लाइन ऐसे कई सुदूर क्षेत्रों को पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी जहाँ अब तक ट्रेन की सुविधा नहीं पहुँच सकी थी.
इसके साथ ही, दक्षिण छत्तीसगढ़ और बस्तर अंचल के विकास के लिए बेहद अहम 140 किलोमीटर लंबी रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर भी तेजी से काम आगे बढ़ रहा है, जिसकी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और टेंडर का काम अंतिम चरण में पहुँच चुका है.
इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे भी मौजूद रहे. मुलाकात के दौरान बस्तर क्षेत्र की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए किरंदुल-कोत्तागुडेम तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल रेल लाइनों के सर्वे का काम भी तेजी से पूरा करने पर सहमति बनी.
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कृषि, खनिज और उद्योगों से समृद्ध छत्तीसगढ़ में रेलवे का विस्तार केवल यात्रियों के आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय क्षेत्रों के विकास, स्थानीय रोजगार और व्यापार को नई दिशा देने का बड़ा जरिया है. उन्होंने केंद्र सरकार के इस सकारात्मक रुख के लिए रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया.