छत्तीसगढ़ और ओडिशा के 40 बंधुआ मजदूर छुड़ाए गए
छत्तीसगढ़ सहित 40 आंध्र प्रदेश में बंधुआ मजदूरी से मुक्त
हैदराबाद । डेस्क: छत्तीसगढ़ और ओडिशा के 40 लोगों को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में दो झींगा फार्मों से बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया गया है. यह कार्रवाई तंगुटुरु मंडल के अनंतवरम गांव के पास गोल्डन एक्वा फार्म और राम ब्रदर्स एक्वा फार्म पर की गई. पुलिस, जिला प्रशासन और गैर-सरकारी संगठनों के संयुक्त प्रयास से यह ऑपरेशन सप्ताहांत में तंगुटुरु, पकाल और पासुकुदुरु क्षेत्रों में चलाया गया.
मुक्त किये गये 40 लोगों में छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा और कांकेर से 23 और ओडिशा के कोरापुट और मलकानगिरी से 17 लोग शामिल हैं, जिनमें 11 महिलायें और एक नाबालिग भी हैं. इन मजदूरों को 15,000 रुपये के अग्रिम भुगतान और अच्छी नौकरी के वादे से लालच देकर लाया गया था. लेकिन, उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया गया.
मजदूरों को अस्थायी शेड में रखा गया, जहां उन्हें तालाब खोदने और झींगों को चारा डालने जैसे काम बिना पर्याप्त भोजन, आराम या उचित मजदूरी के करने पड़े. उनके मोबाइल फोन छीन लिये गये और कुछ ने लोहे की छड़ों से मारपीट और धमकियों की शिकायत की. एक मजदूर के भागकर शिकायत दर्ज करने के बाद छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के अधिकारियों ने त्वरित समन्वय से यह कार्रवाई की.
प्रकाशम कलेक्टर थमिम अंसरिया ने मजदूरों को राहत प्रमाण पत्र जारी किये और उनकी सुरक्षित वापसी के लिये छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों से समन्वय किया. मजदूरों को पहले ओंगोले के राहत केंद्र में ले जाया गया.
आंध्र प्रदेश का झींगा उद्योग, जो भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में बड़ा योगदान देता है, श्रम अधिकार उल्लंघनों के लिए आलोचना झेल रहा है. कमजोर कानूनी कार्रवाई के कारण ऐसी घटनायें जारी हैं. अब प्रशासन पीड़ितों को न्याय और उद्योग में व्यवस्थित सुधार पर ध्यान दे रहा है.