अमेरिकी जनता ईरान से युद्ध के खिलाफ
नई दिल्ली । डेस्क: वाशिंगटन डीसी से प्राप्त ताजा राजनीतिक घटनाक्रम और व्यापक जनमत सर्वेक्षणों के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि अमेरिकी जनता ईरान के साथ चल रहे युद्ध के पूरी तरह खिलाफ खड़ी है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के साथ शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष को एक महीना पूरा होने वाला है, लेकिन अमेरिकी नागरिकों में इसके प्रति असंतोष लगातार गहराता जा रहा है.
जनमत में आई इस भारी गिरावट का मुख्य कारण न केवल युद्ध की अनिश्चितता है, बल्कि इसके कारण घरेलू मोर्चे पर पेट्रोल और गैस की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि भी है. सबसे तीखा विरोध इस बात को लेकर है कि अमेरिकी जनता के पसीने की कमाई और टैक्स के अरबों डॉलर एक ऐसे युद्ध में झोंके जा रहे हैं, जिसका कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आता. ताजा आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता का ग्राफ गिरकर 36 प्रतिशत पर आ गया है, जो उनके कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है.
युद्ध के प्रति जनमानस के कड़े विरोध को समझने के लिए हाल ही में जारी किए गए कई प्रतिष्ठित सर्वेक्षणों के परिणाम साक्ष्य के रूप में देखे जा सकते हैं:
रॉयटर्स/इप्सोस (Reuters/Ipsos) पोल: बुधवार को जारी इस सर्वे में पाया गया कि 61 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक इस युद्ध को सिरे से खारिज करते हैं, जबकि समर्थन देने वाले केवल 35 प्रतिशत हैं.
एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी (AP-NORC) सर्वे: इस शोध में 59 प्रतिशत अमेरिकियों ने स्पष्ट कहा कि ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई 'अत्यधिक' है. खास बात यह है कि रिपब्लिकन समर्थकों में भी अब केवल आधे लोग ही इस कार्रवाई को सही मान रहे हैं.
एनबीसी (NBC) न्यूज सर्वे: हालांकि व्हाइट हाउस 90 प्रतिशत 'मैगा' समर्थकों के साथ का दावा कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध विरोधी राष्ट्रवादी अब खुद को इस आंदोलन से अलग कर रहे हैं.
अमेरिकी करदाताओं के बीच सबसे ज्यादा गुस्सा रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा युद्ध के लिए मांगे गए 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट को लेकर है. आम जनता का मानना है कि उनके 'हार्ड अर्नड' टैक्स डॉलर का इस्तेमाल देश की सीमाओं को सुरक्षित करने या महंगाई कम करने के बजाय 'इंडस्ट्रियल वॉर कॉम्प्लेक्स' को पालने के लिए किया जा रहा है.
रिपब्लिकन सांसद लॉरेन बोएबर्ट और एरिक बर्लिसन ने सार्वजनिक रूप से इस फंडिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब तक पेंटागन अपने पुराने खर्चों का ऑडिट नहीं देता, तब तक जनता के पैसे का एक भी डॉलर युद्ध के नाम पर नहीं दिया जाना चाहिए.
टकर कार्लसन जैसे प्रभावशाली विचारकों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा इजरायल के हितों और विदेशी सैन्य अभियानों के लिए पानी की तरह बहाना 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के खिलाफ है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता के इस भारी विरोध के बावजूद सीनेट में 'वॉर पावर्स' प्रस्ताव का 53-47 के अंतर से गिरना यह दिखाता है कि सत्ता के गलियारों में बैठे नेता जनभावनाओं से कटे हुए हैं. नेशनल ईरानियन अमेरिकन काउंसिल के अध्यक्ष जमाल अब्दी के अनुसार, सांसद इजरायल समर्थक लॉबी के दबाव और युद्ध की अलोकप्रियता के बीच झूल रहे हैं.
अब तक इस युद्ध में 13 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे यह डर और बढ़ गया है कि भारी टैक्स खर्च के बावजूद अमेरिका एक और 'कभी न खत्म होने वाले युद्ध' (Forever War) के जाल में फंस चुका है. मिडटर्म चुनाव नजदीक होने के कारण रिपब्लिकन खेमे में यह घबराहट साफ है कि यदि पेट्रोल पंपों पर कीमतें कम नहीं हुईं, तो टैक्सपेयर्स का यह गुस्सा चुनावी नतीजों में तब्दील हो जाएगा.
कुल मिलाकर, अमेरिकी समाज में इस समय एक गहरी युद्ध-विरोधी लहर है. जनता अब केवल 'टोकन अपोजिशन' से संतुष्ट नहीं है; वे अपने टैक्स के पैसे का हिसाब और इस संघर्ष का तत्काल अंत चाहते हैं. ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती अब केवल ईरान को सैन्य रूप से मात देने की नहीं, बल्कि उस करदाता जनता के आक्रोश को शांत करने की है, जो इस युद्ध को अपनी जेब और देश के भविष्य पर बोझ मान रही है.