राजस्थान हाईकोर्ट में भाई-भतीजावाद और पक्षपात का आरोप
नई दिल्ली । डेस्क: राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों ने न्यायपालिका के भीतर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. इस महीने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को लिखे तीन अलग-अलग पत्रों में जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में खुलेआम "भाई-भतीजावाद और पक्षपात" चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उनके द्वारा बार-बार की गई शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
मामलों को वापस लेने और पसंदीदा वकीलों को वरिष्ठ बनाने के गंभीर आरोप
जस्टिस संदीप मेहता ने अपने पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट की स्थिति को बेहद "चिंताजनक और परेशान करने वाला" बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस कारण के अचानक मामलों को वापस लेकर एसीजे की पीठ को स्थानांतरित किया जा रहा है. इसके अलावा, काम के दिनों में फुल कोर्ट की बैठक आयोजित करके बड़ी संख्या में पसंदीदा वकीलों को 'सीनियर' का दर्जा दिया गया. जस्टिस मेहता का कहना है कि हाईकोर्ट के जज एसीजे के रवैये से पीड़ित हैं और उन्हें सीजेआई से निकटता का हवाला देकर तबादले की धमकियां दी जा रही हैं. उन्होंने हाईकोर्ट के लिए बहुमंजिला गेस्ट हाउस बनाने की योजना को भी जनता के पैसे की बर्बादी करार दिया.
सीजेआई सूर्यकांत का पक्ष: संस्थागत प्रक्रिया से ही होगी कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने और मीडिया रिपोर्टों में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से सीजेआई सूर्यकांत का आधिकारिक बयान जारी किया गया. आधिकारिक विदेश दौरे पर गए सीजेआई ने स्पष्ट किया कि किसी भी कार्यरत जज पर लगे आरोपों से केवल स्थापित संस्थागत तंत्र के माध्यम से ही निपटा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इन पत्रों की सामग्री पर सार्वजनिक रूप से सुनवाई नहीं हो सकती और किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का पूरा और निष्पक्ष अवसर दिया जाएगा.
अन्य राज्य से नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग
जस्टिस मेहता ने अपने पहले पत्र में याद दिलाया कि वे वर्ष 2026 की शुरुआत से ही राजस्थान हाईकोर्ट में किसी अन्य राज्य से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का अनुरोध कर रहे हैं, ताकि संस्थागत निष्पक्षता बनी रहे. सितंबर में सेवानिवृत्त होने जा रहे एसीजे संजीव प्रकाश शर्मा को पिछले साल सितंबर में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था. जस्टिस मेहता का कहना है कि जिस जज को मार्च 2023 में कॉलेजियम द्वारा राजस्थान वापस भेजने से मना कर दिया गया था, उन्हें इतना लंबा अवसर देना समझ से परे है और इस स्थिति की निरंतर अनदेखी न्यायपालिका के हित में नहीं है.