पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक: जयशंकर ने पाक को बताया 'दलाल'
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्षी दलों द्वारा पाकिस्तान की बढ़ती राजनयिक भूमिका पर उठाए गए सवालों का कड़ा जवाब दिया.
विपक्ष ने विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान की सक्रियता और भारत की 'खामोशी' पर सरकार को घेरा. कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने तर्क दिया कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने 26/11 हमलों के बाद पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था, लेकिन आज वह विश्व कूटनीति में प्रमुख स्थान बना रहा है.
इस पर पलटवार करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान को ब्रोकर करार दिया. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान 1981 से ही अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस तरह की 'दलाली' के लिए देशों के पीछे नहीं भागता. जयशंकर ने 1971 के युद्ध का उदाहरण भी दिया जब पाकिस्तान ने अमेरिका और चीन के बीच संवाद कराया था.
बैठक में विपक्ष ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर भारत की चुप्पी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया तेल अवीव यात्रा के समय पर भी गंभीर सवाल उठाए. विपक्षी नेताओं ने पूछा कि प्रधानमंत्री ने हमलों से ठीक दो दिन पहले इजरायल का दौरा क्यों किया?
इसके साथ ही, माकपा नेता जॉन ब्रिटास और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर 'चुप्पी को ही कूटनीति' बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भारत ईरान के हमलों की तो आलोचना करता है, लेकिन अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों पर मौन रहता है.
इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, इसलिए भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए संतुलित रुख अपनाना अनिवार्य है. उन्होंने बताया कि भारत की स्थिति अद्वितीय है और वह सभी पक्षों से बातचीत करने में सक्षम है.
प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी अधिकारियों से बातचीत का ही परिणाम है कि दो भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने दिया गया.
आर्थिक मोर्चे पर, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने देश को आश्वस्त किया कि भारत के पास 74 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुरक्षित है. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि एलपीजी की आपूर्ति चक्र की अवधि 20 दिन से बढ़कर 45 दिन हो गई है, लेकिन जल्द ही स्थिति स्थिर हो जाएगी.
विपक्ष ने कतर से होने वाली एलएनजी आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव पर श्वेत पत्र की मांग की. राकांपा की सुप्रिया सुले ने अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े होने से मिले 'ठोस लाभ' पर सवाल किया, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पूछी. बैठक के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के जवाबों को 'असंतोषजनक' बताते हुए संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा की मांग की है.