पीस बांड नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी शांति बांड नोटिस के खिलाफ AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में पुलिस नोटिस को रद्द करने और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जल्द सुनवाई की मांग की गई है.
नई दिल्ली । डेस्क: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस द्वारा जारी उस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए पर्सनल बॉन्ड (पीस बॉन्ड) निष्पादित करने को कहा गया था. AISA के अनुसार, नेहा बोरा की कानूनी टीम इस मामले में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध करेगी.
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से जुड़ा हुआ है. 16 अक्टूबर को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रही नेहा बोरा को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद 17 अक्टूबर को उन्हें रिहा किया गया.
इसके उपरांत, दिल्ली पुलिस (नई दिल्ली जिला) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 (पठित धारा 135(3)) के तहत 17 अक्टूबर की तारीख वाला एक नोटिस जारी किया. इस नोटिस में उन्हें 19 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होने और जांच अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का पर्सनल बॉन्ड तथा एक जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था.
AISA द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हाईकोर्ट में दायर याचिका में इस नोटिस को तुरंत स्थगित करने और वापस लेने की मांग की गई है. याचिका में तर्क दिया गया है कि पुलिस का यह नोटिस प्रथम दृष्टया अस्पष्ट, तथ्यात्मक रूप से गलत और संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता) तथा अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है.
नेहा बोरा के वकील अभिक चिमनी, प्रांजल अबरोल और मोक्ष की कानूनी टीम SEM कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर नोटिस का जवाब दाखिल करेगी और हाईकोर्ट में विचाराधीन चुनौती से अवगत कराएगी.
छात्र संगठन AISA ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को दबाने का एक सुव्यवस्थित प्रयास करार दिया है. संगठन का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को वापस लेने और 2023 के चुनाव आयोग नियुक्ति कानून को रद्द करने की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलनों को कुचलने के लिए पुलिस BNSS की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) का लगातार दुरुपयोग कर रही है.
AISA ने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सरकार ने 40,000 से अधिक पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती की, कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कराया और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया.