बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक सर्जरी शुरू
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में भारी हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवगठित भाजपा सरकार ने कार्यभार संभालते ही राज्य की नौकरशाही और पुलिस मशीनरी को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सत्ता के गलियारों से मिल रहे संकेत स्पष्ट हैं कि आने वाले महीनों में एक व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन देखने को मिलेगा, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के पहले ही दिन दो महत्वपूर्ण नियुक्तियों के साथ कर दी है.
प्रशासनिक ढांचे में इस बदलाव को चुनाव आयोग द्वारा चुनाव पूर्व किए गए अभूतपूर्व फेरबदल की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर शुभेंदु अधिकारी ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुब्रत गुप्ता को अपना सलाहकार नियुक्त किया. सुब्रत गुप्ता की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने चुनाव आयोग के 'स्पेशल रोल ऑब्जर्वर' के रूप में अहम भूमिका निभाई थी.
उनके साथ ही दक्षिण 24 परगना के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव नियुक्त किया गया है. ये दोनों नियुक्तियां ममता बनर्जी सरकार के समय के भरोसेमंद अधिकारियों अलपन बंदोपाध्याय, एच.के. द्विवेदी और गौतम सन्याल के युग के अंत का प्रतीक हैं, जिन्होंने चुनाव परिणामों के ठीक बाद अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था.
सरकार की यह प्रशासनिक सक्रियता केवल शीर्ष स्तर तक सीमित नहीं है. राज्य प्रशासन ने एक व्यापक आदेश जारी करते हुए पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (कार्यकारी) के कम से कम 46 अधिकारियों का तबादला कर दिया है, जो पिछली सरकार में मंत्रियों के निजी सचिव या ओएसडी के रूप में तैनात थे. इसके अलावा मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) से जुड़े 16 अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पिछली सरकार ने प्रतिभाशाली आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की उपेक्षा की और उन्हें राज्य छोड़ने पर मजबूर किया, लेकिन नई सरकार नीतिगत फैसलों को लागू करने के लिए इन्हीं अधिकारियों की योग्यता का लाभ उठाएगी.
उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बंगाल के प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा फेरबदल किया था, जिसके तहत मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जे.सी. मीणा और डीजीपी पीयूष पांडे जैसे शीर्ष पदों पर नए अधिकारियों की तैनाती की गई थी. अब सत्ता परिवर्तन के बाद यह माना जा रहा है कि शुभेंदु सरकार अपनी प्राथमिकताओं और कानून-व्यवस्था के मॉडल को लागू करने के लिए पुलिस और कार्यकारी नेटवर्क में एक और बड़े ओवरहाल की तैयारी में है.
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि भविष्य में अन्य राज्यों के कैडर अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर बंगाल लाया जा सकता है, जबकि राज्य के कुछ अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा सकता है.
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ लंबी चर्चा की है, जिससे यह साफ है कि सोमवार को होने वाली जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की बैठक बंगाल के नए प्रशासनिक ब्लूप्रिंट की दिशा तय करेगी. बंगाल के प्रशासनिक गलियारों में यह 'सफाई' और 'रियलइन्मेंट' आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है.