दुबई से 15 साल बाद लौटा आरोपी, 1 दिन की सजा हुई
रायपुर । संवाददाता: रायपुर में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कोशिशों से दो दशक पुराना रेलवे टिकट दलाली का एक दिलचस्प मामला आखिरकार अंजाम तक पहुंच गया. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा चलाए जा रहे विशेष वारंट तामील अभियान के तहत RPF दुर्ग की टीम ने इस ठंडे पड़े केस की फाइल दोबारा खोली थी.
RPF की लगातार समझाइश और परिजनों के माध्यम से बनाए गए संपर्क के बाद, 15 सालों से फरार चल रहा आरोपी विदेश से भारत लौटा और रायपुर स्थित विशेष रेलवे अदालत में पेश हो गया.
अदालत में हाजिर हुए आरोपी ने न केवल वारंट में दर्ज नाम-पते की पुष्टि की, बल्कि अपने अपराध को भी स्वीकार कर लिया.
मामले की सुनवाई करते हुए विशेष रेलवे न्यायाधीश ने आरोपी को एक दिन की 'टिल द राइजिंग ऑफ कोर्ट' (TRC) यानी अदालत उठने तक की सजा सुनाई. इसके साथ ही उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसे जमा करने के बाद 22 साल पुराने इस प्रकरण को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया.
यह मामला साल 2004 का है, जब दुर्ग RPF पोस्ट में सुपेला के लक्ष्मी नगर निवासी तिजेंदर सिंह उर्फ टिंकू के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 (अवैध टिकट दलाली) के तहत अपराध दर्ज किया गया था. लंबे समय तक सुनवाई से नदारद रहने के कारण विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर ने 18 अप्रैल 2012 को उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था.
जब आरपीएफ की टीम वारंट तामील कराने आरोपी के पुराने पते पर पहुंची, तो वहां कोई नहीं मिला. सुराग जुटाने पर पता चला कि वह पंजाब के गुरदासपुर जिले स्थित अपने पैतृक गांव बटाला चला गया है.
RPF की टीम जब बटाला में उसके घर पहुंची, तब परिजनों से खुलासा हुआ कि तिजेंदर पिछले 15 वर्षों से दुबई में रहकर बतौर ड्राइवर काम कर रहा है. इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने परिवार को कानूनी नोटिस सौंपते हुए आरोपी को अदालत में समर्पण कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी थी.