'जब तक प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देते, जंतर-मंतर नहीं छोड़ेंगे': CJP
नई दिल्ली । डेस्क: प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधलियों, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है. आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और विरोध का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है.
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आंदोलन की दिशा स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी तब तक जंतर-मंतर से नहीं हटेंगे जब तक कि धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते. उन्होंने 20 जुलाई की घटनाओं को स्वतंत्र भारत के इतिहास में युवाओं की आवाज का एक ऐतिहासिक मोड़ करार दिया.
सोमवार को पुलिस द्वारा सीजेपी के "संसद चलो" मार्च को रोके जाने और उसके बाद हुई कार्रवाई के बावजूद जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच भी देर रात तक देश के विभिन्न हिस्सों से समर्थकों और स्वयंसेवकों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा. प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए आम जनता और सहानुभूति रखने वालों की ओर से भोजन तथा आवश्यक सामग्रियां भेजी जा रही हैं.
दूसरी ओर, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देर रात एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि पार्टी का शांतिपूर्ण प्रदर्शन केवल और केवल जंतर-मंतर पर चल रहा है तथा दिल्ली के किसी अन्य हिस्से में जमावड़े या प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया गया है.
दीपके ने अंदेशा जताया कि आंदोलन को बदनाम करने और शांति भंग करने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों को अन्य इलाकों में भेजा जा सकता है, लेकिन ऐसे लोगों या गतिविधियों से सीजेपी का कोई संबंध नहीं है.
इस पूरे घटनाक्रम ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है और विपक्षी दल खुलकर छात्रों व प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आए हैं.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पूरा देश और दुनिया देख रही है कि कैसे युवाओं की आवाज को सड़कों पर कुचला जा रहा है.
वहीं, संसद परिसर में विरोध स्वरूप काले वस्त्र पहनकर पहुंचीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार के रवैये को "अलोकतांत्रिक" करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के भीतर छात्रों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा तक नहीं करने दी जा रही है और विपक्ष के नेताओं की आवाज दबाई जा रही है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र का मूल आधार अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, जिसे मौजूदा सरकार छीन रही है. उनके साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कई अन्य सांसदों ने भी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में संसद भवन के बाहर प्रदर्शन किया.
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए सभी राजनीतिक दलों और देश के नागरिकों से एकजुट होने की अपील की.
इस बीच, शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता और रणनीतिकार सोनम वांगचुक का अनशन 23वें दिन भी जारी रहा.
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया है, जहां से उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का संकल्प दोहराया है. वांगचुक का कहना है कि वे तब तक अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे जब तक कि शिक्षा तंत्र में सुधार और जवाबदेही तय नहीं हो जाती या संसद में इस विषय पर ठोस चर्चा का आश्वासन नहीं मिलता.