छतीसगढ़ की पंचायतें देश में सबसे पीछे
रायपुर | संवाददाताः देश की पंचायत व्यवस्था को जानने के लिए पहली बार पंचायती राज विभाग ने पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) जारी किया है. जिसमें छतीसगढ़ पूरे देश में फिसड्डी साबित हुआ है. देश में सबसे ज्यादा जिन पंचायतों को डी ग्रेड मिला है, उसमें छत्तीसगढ़ नंबर वन है.
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने हाल ही में 'पंचायत विकास सूचकांक' (पीएआइ) रिपोर्ट जारी की है. देश की लगभग ढाई लाख पंचायतों में से 2.16 लाख पंचायतों को अलग-अलग पैमाने पर जांचा-परखा गया, उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया और फिर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया. पीएआइ में ग्राम पंचायतों के मूल्यांकन नौ विषयों पर आधारित थे.
इनमें गरीबी मुक्त व उन्नत आजीविका, स्वस्थ पंचायत, बाल-अनुकूल पंचायत, जल-पर्याप्त पंचायत, स्वच्छ व हरित पंचायत, आत्मनिर्भर बुनियादी सुविधाओं वाली पंचायत, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण व सुरक्षित पंचायत, सुशासन वाली पंचायत, और महिला अनुकूल पंचायतों को पैमाना बनाया गया था. पीएआई को नौ विषयों को आधार मानकर इसके अंतगर्त 435 अनूठे स्थानीय संकेतकों के आधार पर आंकड़ों और तथ्यों को एकत्र किया गया था.
इन विषयों के आधार पर पंचायतों को 90 से अधिक अंक मिलने पर 'ए प्लस' श्रेणी में रखने की योजना थी लेकिन पूरे देश में कोई भी पंचायत इस पैमाने पर खरी नहीं उतरी. हां, तेलंगाना के कामारेड्डी जिले की बर्नपुर ग्राम पंचायत ने 84.09 अंक प्राप्त किए और 'ए' श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया.
पंचायत उन्नति सूचकांक में दूसरे नंबर की श्रेणी यानी ‘ए’ सूचकांक में गुजरात की 346 और तेलंगाना की 270 ग्राम पंचायतों को जगह मिली.
छत्तीसगढ़ के 11643 पंचायतों से एकत्र आंकड़ों के आधार पर जो विश्लेषण किया गया, उससे पता चलता है कि देश भर में जिन कुल 5896 पंचायतों को फिसड्डी यानी डी श्रेणी में रखा गया है, उसमें सर्वाधिक 1449 अकेले छत्तीसगढ़ की हैं. प्रतिशत के लिहाज से भी छत्तीसगढ़ की पंचायतें सबसे खराब श्रेणी में हैं.
राज्य की एक भी पंचायत को ए प्लस या ए श्रेणी में नहीं रखा गया है. राज्य की 1239 पंचायतों को बी श्रेणी में रखा गया है और 8955 पंचायतों को सी श्रेणी में. केंद्र सरकार की इस रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ की सबसे बेहतर 25 पंचायतों में 73.15 अंकों के साथ सरगुजा ज़िले के बतौली विकासखंड की शिवपुर पंचायत सबसे आगे है.
दूसरे नंबर पर धमतरी ज़िले की नगरी का सांकरा पंचायत है, जिसे 72.49 अंक मिले हैं. तीसरे नंबर पर जशपुर ज़िले के कांसाबेल विकासखंड का कांसाबेल है. कांसाबेल को 72.4 अंक मिले हैं. चौंथे, पांचवें और छठवें नंबर पर धमतरी के ही नगरी की छिपली, हरदीभट्टा, और मुकुंदपुर पंचायत हैं.
सातवें, आठवें और नौवें नंबर पर सरगुजा का प्रतापपुर, तरागी और सुअरपारा हैं. दसवें नंबर पर दुर्ग ज़िले के झोला को स्थान मिला है.
इस क्रम में जो अन्य पंचायत हैं, उनमें 11वें नंबर पर कटकालो, 12वें नंबर पर गगोली, 13वें नंबर पर हीरापुर, 14वें नंबर पर लंजीत, 15वें नंबर पर साल्ही, 16वें नंबर पर मुड़ीपार, 17वें नंबर पर चिरचार, 18वें नंबर पर तिलईडांड, 19वें नंबर पर मुड़ापारा, 20वें नंबर पर नदिया, 21वें नंबर पर कसाही, 22वें नंबर पर फुलकर्रा, 23वें नंबर पर पिकरीपार, 24वें नंबर पर टेड़गा और 25वें नंबर पर नवागांव भवगिर शामिल हैं.
पंचायती राज विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश की 2.16 लाख ग्राम पंचायतों में से, 699 (0.3%) ग्राम पंचायतें अग्रणी हैं. 77,298 (35.8%) सामान्य प्रदर्शन करने वाली हैं, 1,32,392 (61.2%) आकांक्षी हैं, और 5,896 (2.7%) शुरुआती हैं.
346 पंचायतों के साथ गुजरात और 270 पंचायतों के साथ तेलंगाना ‘अग्रणी’ पंचायतों की सूची में सबसे आगे हैं. इस श्रेणी के तहत 1,449 पंचायतों के साथ छत्तीसगढ़ ‘शुरुआती’ पंचायतों की सूची में सबसे आगे है और उत्तर प्रदेश 1,237 पंचायतों के साथ उसके ठीक पीछे है.
पीएआई में 2 लाख 16 हज़ार मान्य पंचायतों में से 35 दशमलव 8 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बेहतर प्रदर्शन करने वाले पंचायतों के रूप में मान्यता दी गई. 61 दशमलव 2 प्रतिशत की पहचान आकांक्षी पंचायतों के रूप में की गई. इनमें गुजरात और तेलंगाना सबसे आगे है.
पंचायत उन्नति सूचकांक के राज्यवार आकलन में गुजरात 346 ग्राम पंचायतों के साथ अग्रणी है, उसके बाद 270 ग्राम पंचायतों के साथ तेलंगाना दूसरे स्थान पर है.
अधिक संख्या में बेहतर मानक प्रदर्शन करने वाले राज्यों में गुजरात (13781), महाराष्ट्र (12,242), तेलंगाना (10099) के साथ मध्य प्रदेश (7,912) और उत्तर प्रदेश (6593) शामिल हैं, जबकि बिहार, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में आकांक्षी ग्राम पंचायतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो केंद्रित विकास प्रयासों की आवश्यकता वाले क्षेत्रों को उजागर करता है.
सरकार का कहना है कि भारत 2030 एसडीजी लक्ष्यों को पाने के लिए सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को स्थानीय स्तर पर कार्यान्वित करने और जमीनी स्तर पर शासन को सशक्त बनाने इन विषय वैश्विक लक्ष्यों को ग्रामीण वास्तविकताओं के साथ जोड़ेंगे, जिससे स्थानीय सरकारों को समग्र विकास के लिए अपनी नीति निर्धारित करने में मदद मिलेगी.
लेकिन पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी यह रिपोर्ट बताती है कि अभी सतत विकास लक्ष्य, कोसों दूर है. बुनियादी मुद्दों पर ही हमारी पंचायतों की हालत खराब है. पंचायती राज का ढोल अपनी जगह है और उसकी हकीकत दूसरी जगह.