छत्तीसगढ़ में सक्रिय 17 माओवादियों ने तेलगांना में किया सरेंडर
छत्तीसगढ़ में सक्रिय 17 माओवादी तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर किया
सुकमा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिले में सक्रिय माओवादी संगठन के 17 माओवादियों ने तेलंगाना में भद्रादी पुलिस अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण किया है.
बताया जा रहा है कि सभी सरेंडर 17 माओवादी अलग-अलग इलाकों में सक्रिय रहे हैं और संगठन में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं.
सरेंडर करने वालों में 2 एसीएम, 4 पार्टी सदस्य और 11 मिलिशिया कैडर हैं. सभी ने माओवादी हिंसा के रास्ते को छोड़ने और अपने परिवार के सदस्यों के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीने का फैसला किया है.
तेलंगाना के भद्रादी जिले के एसपी रोहित राजू ने बताया कि इस साल अब तक तेलंगाना और बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में सक्रिय 282 माओवादियों ने जिला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है.
इनमे से कई इनामी माओवादी भी शामिल हैं. साथ ही कई माओवादियों को गिरफ्तार भी किया गया है. एसपी ने कहा कि तेलंगाना सरकार की ओर से भद्राद्री कोतागुडेम पुलिस सीपीआई (माओवादी) के आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को उचित इनाम दे रही है.
वो स्वेच्छा से मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ राज्य से आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के लिए पुनर्वास का समाधान तेलंगाना पुलिस द्वारा छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ मिलकर किया जा रहा है.
एसपी ने कहा कि सीपीआई (माओवादी) का कोई भी सदस्य अगर तेलंगाना क्षेत्र में प्रवेश करेगा तो वह तेलंगाना पुलिस से बच नहीं पाएगा और तेलंगाना क्षेत्र भी उन्हें शरण नहीं देगा.
बस्तर में 400 से ज्यादा माओवादियों ने 5 महीनों में किया सरेंडर
कर्रेगुट्टालू में हुई मुठभेड़ के बाद तेलगांना के मूलगु जिला के बाद यह दूसरा मामला है, जब छत्तीसगढ़ में सक्रिय माओवादियों ने तेलगांना में सरेंडर किया है.
बस्तर आईजी सुंदरराज पी का कहना है कि लगातार एंटी नक्सल ऑपरेशन से माओवादी बिखरे हुए है और तेलगांना, महाराष्ट्र की ओर रुख कर रहे हैं.
आईजी ने कहा कि माओवादी संगठन बस्तर में अब अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है. सीपीआई के महासचिव बसव राजू के मारे जाने के बाद शेष माओवादी अपनी जान बचाने तेलंगाना में सरेंडर कर रहे हैं.
बस्तर पुलिस द्वारा भी लगातार स्थानीय माओवादियों से सरेंडर करने की अपील की जा रही है.
साल 2025 के 5 महीनों में बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में सक्रिय 400 से ज्यादा माओवादियों ने सरेंडर किया है. जिन्हें पुनर्वास नीति का लाभ दिया जा रहा है.