16 हजार NHM कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में कार्यरत करीब 16 हजार संविदा एनएचएम कर्मचारियों ने बर्खास्तगी की कार्रवाई के बाद गुरुवार को सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. नियमितीकरण सहित अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर एनएचएम कर्मचारी पिछले 18 दिनों से हड़ताल पर हैं.
इस बीच सरकार ने सख्त निर्णय लेते हुए 25 कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दीं, जिनमें प्रदेश संरक्षक हेमंत सिन्हा और महासचिव कौशलेश तिवारी भी शामिल हैं.
इसके बाद आंदोलनरत कर्मचारी आक्रोशित हो गए और सामूहिक इस्तीफा देने का निर्णय लिया.
हालांकि रायपुर सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने कहा है कि ज्ञापन लिया गया है. हालांकि इस तरह के सामूहुिक इस्तीफे का कोई कानूनी महत्व नहीं है और इस इस्तीफे को स्वीकार भी नहीं किया जा सकता.
दरअसल, छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में कार्यरत एनएचएम कर्मचारी अपने-अपने जिलों में अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं.
एक साथ एनएचएम कर्मचारी और अधिकारियों के हड़ताल पर जाने से अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं ठप पड़ गई हैं.
जिसके बाद सरकार ने सख्ती बरतते हुए एनएचएम कर्मचारियों को तत्काल काम पर लौटने के आदेश दिए थे. साथ ही अल्टीमेटम भी दिया गया था.
इसके बाद भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटे तो सरकार ने 25 एनएचएम अधिकारी-कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया.
सरकार का कहना है कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि 10 में से 5 मांगों पर सहमति बन चुकी है. सीआर सिस्टम में पारदर्शिता, लीव सुविधाएं, ट्रांसफर पॉलिसी के लिए समिति, कम-से-कम 10 लाख का कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस और वेतन वृद्धि पर 5 फीसदी का प्रस्ताव शामिल है. मगर कर्मचारी 27 फीसदी बढ़ोतरी और नियमितीकरण पर स्पष्ट रोडमैप चाहते हैं.
इस बर्खास्तगी की कार्रवाई से नाराज होकर प्रदेश भर के 16 हजार एनएचएम कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. जिसमें रायपुर में 14 सौ एनएचएम कर्मचारियों ने इस्तीफा सौंपा है.
वहीं दुर्ग जिले में 850, बिलासपुर में 733, बलौदाबाजार जिले में 421 और कांकेर में 655, बालोद में 502 कर्मचारियों ने इस्तीफा सौंपा है.
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और वे लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार का रुख सख्त है. सरकार कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है.
कर्मचारियों का कहना है कि बातचीत के रास्ते शासन-प्रशासन स्तर पर बंद कर दिए गए हैं. ऐसे में हड़ताल ही एक मात्र विकल्प है, जो जारी रहेगा.