ट्रंप क्यों इतने उतावले हैं बागराम एयरबेस पर कब्जे के लिए?
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान के बागराम एयरबेस को दोबारा अपने कब्जे में लेने के लिए काफी उतावले हैं. उनके कम से कम चार उद्देश्य बताए जा रहे हैं. ट्रंप ने हाल ही में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को धमकी दी है कि अगर बागराम एयरबेस अमेरिका को वापस नहीं सौंपा गया, तो अफगानिस्तान को बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे.
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या होगा. लेकिन सवाल यह है कि ट्रंप इस एयरबेस के नियंत्रण को दोबारा अपने हाथ में लेने के लिए इतने बेचैन क्यों हैं? बागराम में ऐसा क्या है? अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने तीन स्रोतों का हवाला देकर ट्रंप के 'उद्देश्यों' की व्याख्या की है, जबकि कुछ कारण ट्रंप ने खुद बताए हैं.
पिछले गुरुवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने बागराम एयरबेस का जिक्र किया. उन्होंने कहा, "हमने बागराम को बिना किसी वजह के उन्हें (तालिबान) सौंप दिया था. लेकिन हम इसे दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं." ट्रंप ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर तालिबान सरकार से अमेरिका की बातचीत चल रही है.
सीएनएन के सूत्रों से पता चला है कि मार्च से ही व्हाइट हाउस ने अफगानिस्तान प्रशासन से बागराम पर चर्चा शुरू की है. मुख्य रूप से चार कारणों से अमेरिका इस एयरबेस को दोबारा अपने नियंत्रण में चाहता है, जिनमें से एक प्रमुख है चीन. बागराम एयरबेस से चीन की सीमा ज्यादा दूर नहीं है, महज 500 मील के अंदर.
इसके अलावा, अमेरिका अफगानिस्तान में मौजूद कुछ दुर्लभ खनिजों और खदानों का उपयोग करना चाहता है, जहां से आर्थिक लाभ की संभावना है.
तीसरा कारण रिपोर्ट में आतंकवाद निरोध बताया गया है. आईएसआईएस आतंकवादियों से निपटने के लिए बागराम की रणनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है. अमेरिका इस स्थिति का विभिन्न तरीकों से उपयोग कर सकता है.
चौथा, अगर बागराम का नियंत्रण हाथ में आ जाए, तो व्हाइट हाउस अफगानिस्तान के साथ कूटनीतिक वार्ता को दोबारा शुरू करने पर विचार कर सकता है.
लेकिन इन सभी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक चीज जरूरी है- अफगानिस्तान की जमीन पर अमेरिकी सेना की मौजूदगी. 2021 में व्हाइट हाउस ने इसे वापस ले लिया था.
ट्रंप ने पूर्व जो बाइडेन प्रशासन की इस पर आलोचना भी की है. उन्होंने कहा कि अगर वे सत्ता में होते, तो सेना वापसी तो करते, लेकिन बागराम एयरबेस का नियंत्रण कभी ढीला नहीं होने देते.
ट्रंप ने खुद बागराम एयरबेस के बारे में एक अन्य उद्देश्य बताया है. उन्होंने दावा किया कि जहां चीन परमाणु हथियार और मिसाइल बनाता है, वहां से बागराम महज एक घंटे की दूरी पर है.
उनके शब्दों में, "अगर मैं सत्ता में होता, तो अमेरिका अफगानिस्तान से हट जाता, लेकिन बागराम को रख लेता. अफगानिस्तान की वजह से नहीं, चीन की वजह से. क्योंकि जहां चीन परमाणु मिसाइल बनाता है, वहां से बागराम एक घंटे दूर है. वहां एक छोटी फौज रखनी चाहिए थी."
अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदगी के दौरान बागराम एयरबेस बेहद महत्वपूर्ण था. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, बराक ओबामा आदि ने कई बार इस एयरबेस का दौरा किया और वहां से अफगानिस्तान के लोगों को आश्वासन दिया.
अतीत में यह एयरबेस तालिबान के कई हमलों और आत्मघाती हमलों का गवाह रहा है. वर्तमान में तालिबान का इस पर नियंत्रण है. ट्रंप के बयान की निंदा करते हुए रविवार को अफगान सरकार ने बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि एक इंच जमीन भी अमेरिका या किसी अन्य को सौंपने का सवाल नहीं है.