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SC: बिहार SIR में कोई अनियमितता मिली तो होगी रद्द, देशभर में SIR पर रोक नहीं

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15 सित. 2025, 05:50 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 15 सितंबर को कहा कि वह यह मान रहा है कि निर्वाचन आयोग, एक संवैधानिक संस्था होने के नाते, बिहार में विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान कानून का पालन कर रहा है. हालांकि, कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई अनियमितता पाई गई, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाएगा.


न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बिहार SIR की वैधता पर अंतिम सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की. कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर "टुकड़ों में राय" देने से इनकार करते हुए कहा कि बिहार SIR पर उनका फैसला पूरे देश में SIR पर लागू होगा.

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह निर्वाचन आयोग को देशभर में मतदाता सूची के संशोधन के लिए समान प्रक्रिया करने से नहीं रोक सकता. हालांकि, बिहार SIR के खिलाफ याचिकाकर्ताओं को 7 अक्टूबर को देशभर के SIR पर भी तर्क प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई.


कोर्ट ने यह भी कहा कि 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से इस मामले के निर्णय पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा, "अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से हमें क्या फर्क पड़ता है? यदि हमें कोई अनियमितता मिली, तो हम इसे रद्द कर सकते हैं."


इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर के अपने उस आदेश को वापस लेने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें बिहार SIR में आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया गया था.


सुनवाई की शुरुआत में, निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने अनुरोध किया कि SIR प्रक्रिया का अंतिम मूल्यांकन होने तक सुनवाई टाली जाए. 

वहीं, एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि निर्वाचन आयोग अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया की तैयारियां कर रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह प्रक्रिया संवैधानिक योजना के उल्लंघन में पाई गई, तो इसे आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है.


कोर्ट ने कहा कि वह निर्वाचन आयोग को SIR प्रक्रिया करने से नहीं रोक सकता. वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि किसी को भी अवैध पद्धति के कारण वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. 


इस पर पीठ ने कहा, "यदि हमें बिहार SIR में निर्वाचन आयोग की पद्धति में कोई अनियमितता मिलती है, तो पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी जाएगी."


कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई की मांग की, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने देशभर में SIR प्रक्रिया की घोषणा की है.


राष्ट्रीय जनता दल की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग नियमों और अपने ही मैनुअल का घोर उल्लंघन कर रहा है. उन्होंने कहा कि आयोग की वेबसाइट पर आपत्तियों और जोड़ने के अनुरोधों को अपलोड करने में पारदर्शिता की कमी है.


न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि कोर्ट 7 अक्टूबर को मामले की विस्तृत सुनवाई करेगा और सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करेगा. 


बिहार में 2003 के बाद पहली बार हो रहे SIR ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा किया है. विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया लोगों को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित करने के लिए है. 


वहीं, निर्वाचन आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मृतकों, डुप्लिकेट वोटर कार्ड धारकों और अवैध प्रवासियों के नाम हटाकर मतदाता सूची को साफ करना है. 


SIR के परिणामस्वरूप बिहार में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 7.9 करोड़ से घटकर 7.24 करोड़ हो गई है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP