BJP-RSS की विचारधारा का मूल है कमजोरों को पीटना- राहुल गांधी
नई दिल्ली । डेस्क: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोलंबिया में छात्रों के साथ एक संवाद के दौरान भाजपा-आरएसएस की विचारधारा पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस विचारधारा का मूल कायरता है, जहां कमजोरों को निशाना बनाया जाता है लेकिन मजबूत शक्तियों से टकराव से बचा जाता है.
ईआईए विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान का हवाला देते हुए कहा, "यह भाजपा-आरएसएस की प्रकृति है. विदेश मंत्री का बयान देखिए, उन्होंने कहा, 'चीन हमसे कहीं ज्यादा शक्तिशाली है. मैं उनसे कैसे लड़ाई लड़ सकता हूं?' इस विचारधारा के केंद्र में कायरता है."
गांधी ने विनायक दामोदर सावरकर की किताब का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "सावरकर ने अपनी किताब में लिखा है कि एक बार उन्होंने और उनके कुछ दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति को पीटा, और उस दिन उन्हें बहुत खुशी हुई. अगर पांच लोग मिलकर एक व्यक्ति को पीटते हैं और इससे किसी को खुशी मिलती है, तो यह कायरता है. यही आरएसएस की विचारधारा है - कमजोरों को पीटना."
अपनी आलोचना को विस्तार देते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था ही खतरे में है. "भारत में कई धर्म, परंपराएं और भाषाएं हैं. लोकतांत्रिक व्यवस्था सबको जगह देती है. लेकिन अभी यह व्यवस्था हर तरफ से हमले का शिकार हो रही है."
उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस पर देश की बहुलवादी नींव को कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने लोकतंत्र पर हमले को भारत के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया.
गांधी ने भारत की राजनीतिक संरचना की तुलना चीन की केंद्रीकृत व्यवस्था से की और कहा-"भारत के पास 1.4 अरब लोगों के साथ अपार क्षमता है. लेकिन भारत की व्यवस्था चीन से बिल्कुल अलग है. चीन बहुत केंद्रीकृत और एकसमान है. भारत विकेंद्रीकृत है और इसमें कई भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं और धर्म हैं. भारत की व्यवस्था बहुत जटिल है."
उन्होंने विविधता को दबाने की कोशिश को असंभव बताते हुए कहा, "लगभग 16-17 विभिन्न भाषाएं और धर्म. इन विभिन्न परंपराओं को फलने-फूलने देना, उन्हें अभिव्यक्ति का स्थान देना भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हम चीन की तरह लोगों को दबाकर व्यवस्था नहीं चला सकते. हमारी डिजाइन इसे स्वीकार नहीं करेगी."
गांधी ने ऊर्जा के वैश्विक बदलावों और उनके भू-राजनीतिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला.
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन कोयले और स्टीम इंजन से शक्ति मिली, जबकि अमेरिका पेट्रोल और आंतरिक दहन इंजन से- "अब हम इलेक्ट्रिक मोटर की ओर संक्रमण कर रहे हैं, ईंधन टैंक से बैटरी की ओर. अमेरिका की समुद्री दृष्टि और चीन की स्थलीय दृष्टि के बीच असली लड़ाई इसी संक्रमण को नियंत्रित करने की है. अभी तक चीनी जीत रहे हैं."
उन्होंने कहा कि भारत इस महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता के बीच में स्थित है.
रोजगार सृजन की चुनौती पर बोलते हुए गांधी ने भारत और अमेरिका दोनों की समस्याओं का जिक्र किया- "भारत में आर्थिक विकास के बावजूद नौकरियां नहीं पैदा हो पा रही हैं क्योंकि हम सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था हैं और उत्पादन नहीं कर पा रहे. अमेरिका में ट्रंप के साथ ध्रुवीकृत अधिकांश लोग वे हैं जिन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियां खो दीं. चीन ने गैर-लोकतांत्रिक वातावरण में उत्पादन का प्रदर्शन किया है, लेकिन हमें लोकतांत्रिक संरचना चाहिए. इसलिए चुनौती है कि लोकतांत्रिक वातावरण में उत्पादन का ऐसा मॉडल विकसित किया जाए जो चीन से प्रतिस्पर्धा कर सके."