पतंजलि ने च्यवनप्राश विज्ञापनों पर रोक के आदेश को दिल्ली HC में चुनौती दी
नई दिल्ली । डेस्क: पतंजलि आयुर्वेद ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ अपमानजनक विज्ञापन चलाने पर रोक लगाई गई थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यह मामला सामान्य अपमान (जेनेरिक डिस्पैरेजमेंट) का है और पतंजलि के बयान स्पष्ट रूप से डाबर की ओर इशारा करते हैं.
खंडपीठ ने पतंजलि को चेतावनी दी कि यदि यह अपील "विलासिता भरा मुकदमा" (लक्जरी लिटिगेशन) या "निरर्थक अपील" पाई गई, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा.
कोर्ट ने कहा, "आपने अपने विज्ञापन में कहा, '40 जड़ी-बूटियों से बने साधारण च्यवनप्राश से क्यों समझौता करें?' जब आपने 40 जड़ी-बूटियों का उल्लेख किया, तो यह स्पष्ट रूप से डाबर की ओर इशारा करता है."
कोर्ट ने आगे कहा कि पतंजलि का यह दावा कि उनका च्यवनप्राश बेहतर है और डाबर का "साधारण" है, जनता के बीच गलत धारणा बनाता है.
खंडपीठ ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश ने विज्ञापन को अपमानजनक माना है और यह एक अंतरिम आदेश है.
कोर्ट ने पूछा, "हमें इस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए? यह एक विवेकाधीन आदेश है. आपका अपूरणीय नुकसान कहां है?"
कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि वह हर मामले में "आलतू-फालतू" अपीलों की अनुमति नहीं देगा और यदि अपील निरर्थक पाई गई, तो जुर्माना लगाया जाएगा.
पतंजलि के वकील ने कोर्ट से अपने क्लाइंट के साथ चर्चा के लिए समय मांगा, जिसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की.
इससे पहले, 3 जुलाई को एकल न्यायाधीश ने पतंजलि को डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ अपमानजनक विज्ञापन चलाने से रोक दिया था.
कोर्ट ने कहा था कि टीवी और प्रिंट विज्ञापनों में अपमानजनक सामग्री स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. कोर्ट ने डाबर की याचिका पर अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की और पतंजलि को प्रिंट विज्ञापनों से "40 जड़ी-बूटियों से बने साधारण च्यवनप्राश से क्यों समझौता करें?" वाक्य हटाने और हिंदी में इसे संशोधित करने का निर्देश दिया.
एकल न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि टीवी विज्ञापन में रामदेव, जो योग और वैदिक विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध हैं, स्वयं दिखाई देते हैं और उनकी बातें अधिक प्रभाव डालती हैं.
डाबर की याचिका में दावा किया गया कि पतंजलि का "स्पेशल च्यवनप्राश" विज्ञापन डाबर च्यवनप्राश को विशेष रूप से और सामान्य रूप से च्यवनप्राश को अपमानित करता है. याचिका में कहा गया कि विज्ञापन में यह दावा किया गया कि "अन्य कोई निर्माता च्यवनप्राश बनाना नहीं जानता" और सभी च्यवनप्राश को "साधारण" और "हीन" बताया गया.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि विज्ञापन में गलत और भ्रामक बयान दिए गए, जिसमें दावा किया गया कि अन्य निर्माताओं को आयुर्वेदिक ग्रंथों और च्यवनप्राश बनाने की प्रक्रिया का कोई ज्ञान नहीं है.