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टाइफस रोग की चपेट में काठमांडू

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01 अक्टू. 2025, 12:44 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

टाइफस
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काठमांडू । डेस्क: नेपाल की राजधानी काठमांडू इस समय अपने सबसे बड़े स्क्रब टाइफस (scrub typhus) के प्रकोप से जूझ रही है. सुक्रराज ट्रॉपिकल एंड इंफेक्शियस डिजीज हॉस्पिटल (STIDH) में हाल के हफ्तों में दर्जनों मरीजों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है, जो इस बीमारी के तेजी से फैलने का संकेत देता है.


हाल ही में, एक 40 वर्षीय पुरुष को पांच दिनों तक बुखार, तेज सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, लाल आंखें और मतली की शिकायत के साथ STIDH में भर्ती किया गया. जांच में उनकी दाहिनी जांघ पर एक काला घाव (eschar) पाया गया, जो स्क्रब टाइफस का प्रमुख लक्षण है. इसके अलावा, उन्हें सांस लेने में तकलीफ की भी शिकायत थी. इसी तरह, 30 वर्षीय एक महिला को तेज बुखार, सिरदर्द और पेट दर्द के साथ अस्पताल में भर्ती किया गया. एक अन्य महिला मरीज में सात दिनों तक बुखार और सांस लेने में तकलीफ देखी गई. ये सभी मरीज काठमांडू के निवासी थे.

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स्क्रब टाइफस, ओरिएंटिया सुसुगामुशी (Orientia tsutsugamushi) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जो संक्रमित चिगर माइट्स (larval mites) के काटने से मनुष्यों में फैलता है. चूहे इस बीमारी के प्रमुख वाहक हैं. नेपाल हेल्थ रिसर्च काउंसिल (NHRC) के एक अध्ययन में 25% चूहों में चिगर माइट्स पाए गए, जो इस बीमारी के प्रकोप की संभावना को दर्शाता है. काठमांडू के घरों में चूहों की आम मौजूदगी के कारण भविष्य में भी इस तरह के प्रकोप का खतरा बना हुआ है.


लक्षण और निदान


स्क्रब टाइफस के लक्षण आमतौर पर चिगर माइट के काटने के 5 से 20 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं, जिनमें तेज बुखार, दाने, गंभीर सिरदर्द, लाल आंखें, सूजी हुई लिम्फ नोड्स, मतली, उल्टी और अत्यधिक पसीना शामिल हैं. इस प्रकोप में, लगभग सभी मरीजों में सांस लेने में तकलीफ देखी गई, जो एक असामान्य लेकिन महत्वपूर्ण लक्षण है. काला घाव (eschar) भी इस बीमारी का एक प्रमुख संकेत है, जो काटने वाली जगह पर बनता है. हालांकि, यह केवल 33% मरीजों में देखा गया, क्योंकि यह घाव अक्सर शरीर के छिपे हुए हिस्सों में होता है.


डेंगू के साथ सह-संक्रमण का खतरा


काठमांडू में स्क्रब टाइफस के साथ-साथ डेंगू वायरस का प्रसार भी हो रहा है. हाल ही में, एक ही परिवार के दो मरीजों में स्क्रब टाइफस और डेंगू दोनों की पुष्टि हुई. इन मरीजों में स्क्रब टाइफस जैसे लक्षण थे, लेकिन प्रयोगशाला जांच में डेंगू से संबंधित लक्षण जैसे कम प्लेटलेट काउंट और बढ़े हुए लिवर एंजाइम पाए गए. दोनों मरीज बिना अस्पताल में भर्ती हुए ठीक हो गए. हालांकि, कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि स्क्रब टाइफस और डेंगू का सह-संक्रमण गंभीर बीमारियों जैसे निमोनिया, मेनिन्जोएन्सेफलाइटिस और मल्टीपल ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम का कारण बन सकता है.


शहरी क्षेत्रों में प्रकोप के कारण


काठमांडू जैसे शहरी क्षेत्रों में स्क्रब टाइफस के बढ़ते मामलों के पीछे तेजी से शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और चूहों के साथ मानव संपर्क को जिम्मेदार माना जा रहा है. पार्कों में घूमना, बागवानी या पहाड़ी क्षेत्रों में हाइकिंग जैसी गतिविधियां चिगर माइट्स के संपर्क में आने का खतरा बढ़ाती हैं. हालांकि, STIDH में भर्ती अधिकांश मरीजों ने बाहरी गतिविधियों में शामिल होने से इनकार किया, जिससे संकेत मिलता है कि यह बीमारी घरों के अंदर भी फैल सकती है.


उपचार और रोकथाम


वर्तमान में स्क्रब टाइफस के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसे एंटीबायोटिक्स से प्रभावी ढंग से ठीक किया जा सकता है, जो नेपाल में आसानी से उपलब्ध हैं. इस बीमारी की रोकथाम के लिए चूहों के नियंत्रण और स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है.


काठमांडू में स्क्रब टाइफस और डेंगू के सह-संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं. हालांकि अभी तक गंभीर मामलों में वृद्धि नहीं देखी गई है, लेकिन आने वाले समय में इसके जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस प्रकोप के सटीक कारणों और प्रसार के तरीकों को समझने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP