IMF अनुमान: 2026 में भारत पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
IMF अनुमान: 2026 में भारत पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान पीछे होगा
नई दिल्ली । डेस्क: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताज़ा अनुमान के अनुसार, वर्ष 2026 में जापान की अर्थव्यवस्था भारत से पीछे छूट सकती है. यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो भारत नाममात्र जीडीपी (डॉलर आधार पर) के मामले में दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जबकि जापान की वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभावशीलता को झटका लग सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार जापान की धीमी आर्थिक रफ्तार, कमजोर येन और घटती आबादी इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई–सितंबर तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था छह तिमाहियों में पहली बार सिकुड़ी. इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे शुल्कों के कारण निर्यात में आई कमजोरी बताई जा रही है.
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की सरकार इस चुनौतीपूर्ण दौर में एक नई विकास रणनीति पर काम कर रही है, जिसे आगामी गर्मियों में पेश किया जाना है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सिकुड़ती आबादी के बोझ और कम होती उत्पादकता से निपटने के लिए यह रणनीति बेहद अहम होगी.
संगठन आर्थिक सहयोग और विकास (OECD) का अनुमान है कि विस्तारवादी वित्तीय नीतियों और घरेलू उपभोग में बढ़ोतरी के चलते इस वर्ष जापान की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 0.9 प्रतिशत रह सकती है.
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जापान को दो बड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है येन की लगातार गिरती कीमत और चीन के साथ बढ़ता कूटनीतिक तनाव. कमजोर येन से आयात महंगा हो रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है.
मिजुहो रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज़ के वरिष्ठ अर्थशास्त्री युसुके कोशियामा के अनुसार, यदि मुद्रा अवमूल्यन से पैदा हुई महंगाई, सरकार के राहत उपायों पर भारी पड़ी तो जापान “स्टैगफ्लेशन” यानी कम विकास के साथ ऊंची महंगाई के दौर में फंस सकता है.
चीन के साथ रिश्तों में तनाव भी जापान की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है. हाल के महीनों में ताइवान को लेकर जापानी नेतृत्व की टिप्पणियों के बाद बीजिंग ने अपने नागरिकों को जापान यात्रा से बचने की सलाह दी है. इससे पर्यटन प्रभावित होने और कंपनियों की कमाई, निवेश व वेतन वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
IMF के अनुसार, जापान पहले ही जर्मनी से पीछे छूट चुका है और अब भारत उससे आगे निकलने की राह पर है. मित्सुबिशी यूएफजे रिसर्च के अर्थशास्त्री शिनिचिरो कोबायाशी का कहना है कि वैश्विक रैंकिंग में गिरावट से जापान का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, विश्व अर्थव्यवस्था और राजनीति में प्रभाव कम हो सकता है.
विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि जापान की मूल समस्या कम उत्पादकता है, जिसे पिछले कई दशकों की नीतियां भी पर्याप्त रूप से नहीं सुधार पाईं. ताकाइची सरकार ने जहाज निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर सहित 17 रणनीतिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने की घोषणा की है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पर्यटन, डीकार्बोनाइजेशन, रोबोटिक्स और स्वचालित वाहनों जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए.
कुल मिलाकर, 2026 में भारत का जापान से आगे निकलना केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं होगा, बल्कि यह एशिया और वैश्विक शक्ति संतुलन में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है. (Symbolic Photo)