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HC: बिना तलाक दूसरी पत्नी के साथ रहना 'दुराचार', बच्चे की कस्टडी से इंकार

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21 जन. 2026, 02:45 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बाल अभिरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई पिता अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी महिला के साथ रह रहा है, तो यह कस्टडी के मामले में 'दुराचार' और 'क्रूरता' माना जाएगा. जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने लक्ष्मीकांत जोशी बनाम लोकेश्वरी मामले में पिता की अपील को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है और इसे पिता की बेहतर वित्तीय स्थिति के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.


अदालत ने कहा कि पिता भले ही प्राकृतिक अभिभावक हो, लेकिन उसका यह अधिकार पूर्ण नहीं है और बच्चे के हितों के सामने यह गौण है. 

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मामले के अनुसार, पिता ने दलील दी थी कि मां की कोई आय नहीं है और वह आर्थिक रूप से बच्चे की देखभाल करने में सक्षम नहीं है, जबकि वह खुद वित्तीय रूप से समृद्ध है. 


हालांकि, हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल आर्थिक संपन्नता बच्चे के समग्र कल्याण की गारंटी नहीं है. 


कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि एक सौतेली मां के साथ अनिश्चित वातावरण में रहने की तुलना में, बच्चा अपनी सगी मां के पास अधिक सुरक्षित है और वहां उसे बेहतर प्यार और माहौल मिल रहा है. 


कोर्ट ने अंततः माना कि पिता का दूसरी महिला के साथ रहना बच्चे के भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए बच्चे की कस्टडी मां के पास ही रहेगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP