छत्तीसगढ़ के चिकित्सायलयों में विशेषज्ञ नहीं
छत्तीसगढ़ के चिकित्सायलयों में विशेषज्ञों की कमी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरकारी चिकित्सायलयों में चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी है. छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में चिकित्सा विशेषज्ञों के 1438 पद स्वीकृत हैं जिसमें से केवल 277 पदस्थ हैं तथा 1161 पद रिक्त पड़े हैं तथा 17 अनुबंध के आधार पर हैं. सरकार भी इस हालत में नहीं है कि इन पदों को कब तक भरा जा सकेगा यह बता सके.
गौरतलब है कि आजकल जीवन शैली के रोग बढ. रहें हैं. जिनमें उच्च रक्तचाप, डाइबिटीज, दमा, किडनी के रोग, कैंसर, हृदयरोग, न्यूरोलाजिकल बीमारियां, मानसिक बीमारियां प्रमुख है. इन सब बीमारियों में चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है, खासकर सुपर स्पेस्लिस्ट डॉक्टरों की.
अलग-अलग बीमारी के लिये अलग-अलग चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है. कैंसर रोग विशेषज्ञ, हृदयरोग के मरीजों का इलाज नहीं कर सकता है. इसी तरह से सर्जरी का विशेषज्ञ, डाइबिटीज के मरीज का ईलाज नहीं कर सकता है.
ऐसे में यदि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं रहेंगे तो मरीजों को निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को दिखाना पड़ेगा. जहां मोटी फीस देनी पड़ती है. इस तरह से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी निजी क्षेत्र के लिये कमाई का जरिया बन गया है.
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस मामले में सबसे बुरा हाल सुकमा जिले का है जहां चिकित्सा विशेषज्ञ के 25 पद स्वीकृत है जबकि एक भी चिकित्सा विशेषज्ञ वहां पर नहीं हैं. पूरे 25 पद रिक्त पड़े हैं.
इसी तरह से बीजापुर तथा कांकेर जिलों में चिकित्सा विशेषज्ञों के 49-49 पद स्वीकृत हैं तथा केवल 1-1 पद पर विशेषज्ञ पदस्थ है जबकि 48-48 पद खाली पड़े हैं. ऐसे में यहां के मरीज कहां जाकर अपनी चिकित्सा कराये.
दंतेवाड़ा में चिकित्सा विशेषज्ञों के 39 पद स्वीकृत जहां मात्र 4 चिकित्सक अपनी सेवायें दे रहें हैं तथा 35 विशेषज्ञों के पद रिक्त पड़े हुये हैं. जशपुर में 54 पद हैं जबकि रिक्त पड़ों की संख्या 44 है. केवल 10 विशेषज्ञ अपनी सेवायें दे रहें हैं.
जहां तक बड़े शहरों का हाल है तो राजधानी रायपुर में भी विशेषज्ञों के 76 पद हैं जिसमें से 45 रिक्त पड़े हैं तथा 31 विशेषज्ञ पदस्थ हैं. बिलासपुर में 15 पद स्वीकृत हैं तो 10 पद रिक्त पड़े हैं. दुर्ग में 87 पद स्वीकृत हैं जिसमें से मात्र 30 पद भरे हैं तथा 57 पद खाली पड़े हुये हैं.