कोयला घोटाले में 10 अधिकारियों के खिलाफ ED की सिफारिश
रायपुर । संवाददाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 570 करोड़ रुपये के छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाले में कथित संलिप्तता के लिए दस वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है. इस सिफारिश को मुख्य सचिव अमिताभ जैन और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को भेजा गया है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन का हवाला दिया गया है.
ED की जांच में पाया गया कि कोयला परमिट को ऑनलाइन से ऑफलाइन मोड में बदलने की प्रक्रिया ने कोयला व्यापारियों से अवैध लेवी वसूलने का रास्ता खोला. इस घोटाले में मुख्य आरोपी के रूप में व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को चिह्नित किया गया है, जिन्हें इस योजना का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.
इसके अलावा, पूर्व खान निदेशक IAS समीर विश्नोई, रानू साहू और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया भी इस मामले में शामिल हैं. इन सभी को जनवरी 2024 में EOW द्वारा दर्ज FIR के बाद गिरफ्तार किया गया था, हालांकि वे वर्तमान में जमानत पर हैं.
ED ने जब्त किए गए दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड्स और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ाया है. जांच में सामने आया कि जुलाई 2020 में समीर विश्नोई द्वारा जारी एक आदेश ने कोयला परमिट को ऑफलाइन करने की प्रक्रिया शुरू की, जिससे व्यापारियों से अवैध वसूली की गई.
इस मामले ने उच्च पदस्थ अधिकारियों की कथित संलिप्तता और भ्रष्टाचार के बड़े पैमाने के कारण व्यापक ध्यान आकर्षित किया है. छत्तीसगढ़ सरकार और EOW अब इन सिफारिशों की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई करेंगे.
इसके साथ ही, ED ने कस्टम मिलिंग घोटाले से संबंधित छापेमारी भी की है. रायपुर, बिलासपुर और धमतरी में राहेजा और सुल्तानिया समूहों से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई. इन छापेमारियों का उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और मिलिंग व व्यापार क्षेत्र में अनियमित लेनदेन से संबंधित साक्ष्य एकत्र करना था.
अधिकारियों ने कई दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड्स जब्त किए हैं, जिनका विश्लेषण करके व्यापारिक समूहों और सार्वजनिक अधिकारियों के बीच संभावित संबंधों और अनुचित वित्तीय प्रभावों का पता लगाया जा रहा है.