लॉ छात्रों पर कार्रवाई का BCI को अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है. शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक छात्र वकील के रूप में नामांकित नहीं हो जाते, तब तक उनके आचरण को नियंत्रित करना BCI के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.
यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब अदालत 'नालसार हैदराबाद' (NALSAR) के वर्ष 2026 बैच के छात्रों से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी.
दरअसल, BCI ने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने का विरोध करने पर इन छात्रों का नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया था. हालांकि, बाद में काउंसिल ने इस फैसले को वापस ले लिया था.
सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया कि BCI का यह फैसला पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर था. चूंकि विवादित सर्कुलर पहले ही वापस लिया जा चुका है, इसलिए अदालत ने इस मामले को बंद कर दिया.
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत BCI को छात्रों पर कोई दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की शक्ति नहीं दी गई है. यह अधिकार केवल उस विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान के पास सुरक्षित है जहाँ छात्र अध्ययनरत हैं.
कोर्ट के अनुसार, BCI का काम केवल कानूनी शिक्षा के मानकों को तय और लागू करना है, न कि छात्रों पर कार्रवाई करना.
इस दौरान CJI सूर्यकांत ने बीसीआई के रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल उनके और छात्रों के बीच का संवाद था और इसमें BCI का हस्तक्षेप पूरी तरह से अनावश्यक था.