प. बंगाल: भाजपा शासन में भी नहीं थम रहा 'रंगदारी' का खेल
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल में 'तोलाबाजी' (रंगदारी) और 'सिंडिकेट राज' को खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी अब खुद अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हरकतों से असहज नजर आ रही है. राज्य के विभिन्न हिस्सों से भाजपा कार्यकर्ताओं पर ही बिल्डरों, व्यापारियों और पूजा समितियों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप लग रहे हैं.
मामला इतना गंभीर हो चुका है कि खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य और राज्य के मंत्रियों को सार्वजनिक रूप से कार्यकर्ताओं को इस तरह की गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी देनी पड़ रही है.
दमदम, राजारहाट, न्यू टाउन और उत्तर 24 परगना के कई इलाकों में रियल एस्टेट डेवलपर्स का आरोप है कि सरकार बदलने के बाद केवल चेहरे बदले हैं, वसूली का ढर्रा वही है. उत्तर कोलकाता के जेसोर रोड और बिराटी स्थित पार्टी दफ्तरों से रंगदारी मांगे जाने के मामले सामने आए हैं.
कई स्थानों पर तो पैसे न देने पर व्यापारियों के साथ मारपीट की घटनाएं भी हुई हैं. वहीं, पांडवेश्वर से भाजपा विधायक जितेंद्र तिवारी ने भी सार्वजनिक मंच से स्वीकार किया कि कुछ कार्यकर्ता पिछली सरकार के लूट और रंगदारी वाले मॉडल पर ही काम कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है.
हालात पर काबू पाने के लिए भाजपा संगठन ने अब तक लगभग 50 नेताओं व कार्यकर्ताओं को निष्कासित किया है और 300 से अधिक को निलंबित किया है.
कई जगहों पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वसूली में शामिल स्थानीय नेताओं को गिरफ्तार भी किया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कट-मनी और सिंडिकेट की शिकायत दर्ज कराने के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं.
पार्टी नेतृत्व और मंत्रियों का मानना है कि दशकों से चली आ रही इस कार्यसंस्कृति को रातों-रात खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन सरकार और संगठन इसे जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.