पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट पुनरीक्षण के तनाव से अब तक 11 मौतें!
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. जिसके कारण कथित तौर पर अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ आत्महत्याएं भी शामिल हैं. गुरुवार को बंगाल में मरने वाले दो लोगों के परिजनों ने अपनी मौत का कारण SIR प्रक्रिया से उत्पन्न तनाव को बताया है.
तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठा रही है. TMC ने 'X' पर पोस्ट कर कहा, "हर जान का जाना आतंक, अपमान और राज्य-प्रायोजित धमकी से कुचले गए एक इंसान की मौत है. कुलपी के शाहबुद्दीन पाइक, जिनकी पत्नी का नाम 2002 की SIR लिस्ट में न होने के कारण कई दिनों के मानसिक कष्ट के बाद दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई, इस शर्मनाक प्रयोग के नवीनतम शिकार हैं. उनकी मौत अपेक्षित थी. इसे रोका जा सकता था. यह अक्षम्य है."
दक्षिण 24-परगना के कुलपी में, 45 वर्षीय शाहबुद्दीन पाइक को गुरुवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत हुई और अस्पताल में भर्ती कराया गया. कुलपी विधायक जोगरंजन हलदर और मथुरापुर सांसद बापी हलदर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की. बापी हलदर ने बताया, "परिवार के सदस्यों ने हमें बताया कि वह घबराए हुए थे क्योंकि उनका और उनकी पत्नी का नाम 2002 की SIR सूची से गायब था."
बीरभूम के सैंथिया में, बिमैन प्रमाणिक भी तनाव में थे क्योंकि 2002 की SIR मतदाता सूची में उनका नाम गलती से 'पाल' लिखा हुआ था. स्थानीय पार्षद पिनाकीलाल दत्ता ने उन्हें आश्वस्त किया था, लेकिन मृतक के छोटे भाई बिधान ने बताया कि वह परिणाम को लेकर चिंतित थे.
राजनीतिक नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि दो दशक पहले हुए पिछले SIR अभ्यास का नागरिकता से कोई संबंध नहीं था और मतदाताओं के बीच कोई enumeration फॉर्म वितरित नहीं किए गए थे. यह SIR प्रक्रिया बिहार में घोषित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां मामला अभी भी लंबित है.
इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कलकत्ता के मध्य में SIR प्रक्रिया के खिलाफ एक विरोध रैली का नेतृत्व किया. मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर enumeration फॉर्म मिलने के बावजूद इसे भरने से इनकार कर दिया है. ममता बनर्जी ने गुरुवार को अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा, "जब तक बंगाल के प्रत्येक और हर मतदाता अपना फॉर्म नहीं भरते, मैं अपना फॉर्म जमा नहीं करने वाली."